मार्च २०, २०१९
हिमाचल प्रदेशके सिरमौर जनपदके पांवटा साहिबके एक निजी उद्योगमें काम करनेवाली युवतीने युवकपर विवाहका झांसा देकर यौन शोषणके आरोप लगाए हैं । तीन माहसे गर्भवती युवतीको पुलिससे भी न्याय नहीं मिल रहा है, वरन जांच अधिकारी युवतीको गर्भपातकर (अबॉर्शनकर) युवकको भुला देनेकी बात कह रहे हैं । उत्तरप्रदेशके मिर्जापुरकी एक युवतीका हिमाचल प्रदेशके पांवटा साहिबमें विवाहका झांसा देकर यौन शोषणका प्रकरण सामने आया है । पीडिता निजी कंपनीमें काम करती है । इसी मध्य उसकी भेंट उसी कंपनीमें काम कर रहे बिहारके निवासी गुड्डू यादवके साथ हुई । युवती इसी वर्ष जनवरीमें १८ वर्षकी हुई है । वह तीन माहसे गर्भवती है ।
युवतीका आरोप है कि गुड्डू यादवने उसे विवाहका झांसा देकर उसे अपने साथ रखा और उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए; परन्तु जब युवतीने उससे विवाह करनेको कहा तो युवक टालमटोल करता रहा । आरोपी युवक जब विवाहके लिए तैयार नहीं हुआ, तब युवतीने इसकी लिखित परिवाद पांवटा पुलिस स्थानकमें कर दी । यद्यपि, पुलिसने आरोपी युवक और युवतीको थाना बुलाकर सन्धि करवानेका प्रयास किया था ।
पीडिताका कहना है कि आरोपी गुड्डू यादव पांवटा साहिबसे भाग गया है, जिसकी सूचना उसने पांवटा पुलिसके जांच अधिकारीको दे दी है । जांच अधिकारीने पीडिताकी सहायता करनेके स्थानपर उसे गर्भपात (अबॉर्शन) करनेका परामर्श दे डाला । यद्यपि, युवतीने गर्भपात (अबॉर्शन) करवानेसे स्पष्ट मना कर दिया और न्यायके लिए मीडियाकर्मियोंसे भेंट कर रही हैं ।
“संस्कारहीनता, न्यायतन्त्र और तथाकथित लोकतन्त्र इसके लिए उत्तरदायी है । संस्कारहीनताके परिणामस्वरूप विवाहोत्तर और विवाहपूर्व सम्बन्ध एक साधारण बात हो चुकी है । उसके उपरान्त जब तथाकथित प्रेमका भूत उतरता है और आजके पुरूषोंकी नपुंसक वृत्तिकी सत्यता उजागर होती है और उसके उपरान्त हमारा विधान ऐसे लोगोंको कुकृत्योंको करनेके लिए प्रेरित करता है । यदि न्यायकर्ता ही इस प्रकारके निर्णय सुनाने लगे तो न्यायका अर्थ ही क्या रह जाएगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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