दिसम्बर १५, २०१८
जम्मू कश्मीरके मुख्यधाराके राजनीतिक दलोंने पुलवामा जनपदमें एक मुठभेडके मध्य सुरक्षा बलोंकी कथित कार्यवाहीमें आम नागरिकोंके मारे जानेकी घटनाकी शनिवारको निंदा की । नेशनल कांफ्रेंसके उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्लाने घटनाको ‘नरसंहार’ बताया । वहीं राज्यकी पूर्व मुख्यमन्त्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्तीने कहा, ‘अन्ततः कब तक हम अपने युवाओंकी अर्थीको कांधा देते रहेंगे ?’
पीडीपी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने ट्वीट किया, ‘किसी भी जांचसे उन निर्दोष लोगोंके प्राण वापस नहीं आएंगें !’ कोई भी देश अपने ही लोगोंकी हत्यासे युद्ध नहीं जीत सकता । मैं इन हत्याओंकी निंदा करती हूं और इसको रोकनेके लिए एक बार पुनः प्रयासोंकी विनती करती हूं ।’
उमर अब्दुल्लाने आरोप लगाया कि राज्यपाल सत्यपाल मलिकके नेतृत्व वाला प्रशासन जम्मू कश्मीरके लोगोंकी सुरक्षाके लिए वस्तुत: कुछ नहीं कर रहा है । अब्दुल्लाने कहा कि अत्यधिक बल प्रयोगके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता और इसे ‘नरसंहार’ कहना ही ठीक होगा ।
उन्होंने ट्विटरपर लिखा, ‘सात नागरिक मारे गए हैं । इतने अधिक बल प्रयोगके लिये कोई स्पष्टीकरण नहीं आया । अब तक किसीने भी कुछ नहीं कहा है । यह एक नरसंहार है और इसे बस यही कहा जा सकता है ।’ इससे पहले नेकां उपाध्यक्षने कहा था कि मुठभेडको ‘विशेष ढंगसे’ किया गया !
अब्दुल्लाने ट्वीट किया, ‘छह नागरिक मारे गए और कई अन्य चोटिल हैं । मुठभेड स्थलोंके आस पास प्रदर्शन अपवाद नहीं बल्कि सामान्य बात हो गई है । अन्ततः हम इनसे अच्छे ढंगसे निपटना कब सीखेंगे ?’ उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्यपालका प्रशासन ‘संकटग्रस्त’ घाटीमें शांति बनाए रखनेके लिए कुछ नहीं कर रहा है ।
जम्मू कश्मीर प्रदशे कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) अध्यक्ष जी ए मीरने इन हत्याओंको लेकर विरोध प्रकट किया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण, दुखद और निंदनीय बताया । जेकेपीसीसी प्रमुखने कहा कि केन्द्रके साथ-साथ जम्मू कश्मीर सरकार घाटीमें शान्तिपूर्ण वातावरण बनानेमें असफल रही है ।
अलगावादसे मुख्यधाराके नेता बने और पूर्व मन्त्री सज्जाद लोनने कहा कि प्रशासनको इस प्रकारके आतंकवाद विरोधी अभियानोंके मूल्यको ‘गम्भीरतासे आंकने’की आवश्यकता है ।
“आतंकियोंका समर्थन करने वाले अल्पायुके आतंकियोंको ‘युवाओं’की संज्ञा देकर भारतीय सेनाका अपमान करने वाले राष्ट्रद्रोही राजनीतिक दल कभी सैनिकोंकी हत्यापर दुःख प्रकट किए हैं क्या ? इतने सैनिक पत्थरबाज आतंकियोंद्वारा मारे जाते हैं, तब यह संवेदना प्रकट क्यों नहीं की ? क्या वे किसीके पुत्र नहीं हैं ? और ये सब नेता अपनी एक-एक सन्तानको भारतीय सेनामें भेजे, तब इन्हें ज्ञात होगा कि आतंकी और युवाओंमें क्या अन्तर होता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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