पूजामें प्रयोग होनेवाली ये सामग्रियां कभी नहीं होती बासी !


पूजामें प्रयोग होनेवाली ये सामग्रियां कभी नहीं होती बासी, पुरानी होनेपर भी आप कर सकते हैं इनका प्रयोग –

पूजा-पाठमें बासी सामग्रियोंका प्रयोग करना वर्जित माना जाता है । जैसे बासी फूल-पत्ती, जल, फल इत्यादि कभी नहीं चढाए जाते हैं; किन्तु कुछ ऐसी सामग्रियां हैं जिनका प्रयोग आप उनके बासी होनेपर भी पूजामें कर सकते हैं ।
आइए, जानते हैं उन सामग्रियोंके विषयमें :-

गंगाजल : धर्मशास्त्रोंके अनुसार, पूजामें बासी जलका प्रयोग कदापि नहीं करना चाहिए; किन्तु गंगाजलको कभी बासी नहीं माना गया है । वायुपुराणके साथ-साथ स्कन्दपुराणमें भी इस बातका उल्लेख मिलता है कि गंगाजल कितना भी पुराना हो, वह कभी भी बासी नहीं होता है ।

बेलपत्र : शास्त्रोंके अनुसार, भगवान शिवके प्रिय बेलपत्र, छह माहतक बासी नहीं माने जाते हैं । अतः इनपर जल छिडककर पुनः शिवलिंगपर अर्पित किया जा सकता है । पूजामें इसका प्रयोग कभी भी किया जा सकता है । मन्दिरों एवं घरोंमें भगवान शिवको चढनेवाले बेलपत्रका प्रयोग औषधिके रूपमें भी किया जाता है ।

तुलसीकी पत्ती : बेलपत्र एवं गंगाजलकी ही भांति तुलसीदल भी कभी बासी नहीं मानी जाता है । यदि पूजा हेतु तुलसीके नूतन पत्ते नहीं मिल रहे हैं तो आप पुराने चढे हुए तुलसीके पत्ते भी चढा सकते हैं । ध्यान रहे कि भगवान शिव, भगवान गणेश और भैरवको तुलसी नहीं चढानी चाहिए । तुलसी दलको भगवानपरसे उतारनेके पश्चात उसे जलमें प्रवाहित कर देना चाहिए अथवा किसी गमले या क्यारीमें डाल देना चाहिए जिससे वे किसीके पांवसे न दबें ।

कमलका पुष्प : पूजा-पाठमें पुष्पोंका विशेष महत्त्व होता है; किन्तु बासी पुष्पको चढाना उतना ही वर्जित माना जाता है । धर्मशास्त्रोंके अनुसार, मात्र एक पुष्पका वर्णन मिलता है जो बासी नहीं माना जाता और वह है, कमलका पुष्प । मां लक्ष्मीको विशेष रूपसे कमलका पुष्प अर्पित किया जाता है । कमलका पुष्प पांच दिनोंतक जल छिडककर दोबारा चढा सकते हैं ।



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