नामजप करते समय हमारा भाव कैसा होना चाहिए जिससे वह ईश्वर चरणोंतक पहुंचे, इसके विषयमें अबतक हमने पूर्वके लेखोंमें कुछ तथ्य जाने थे, इसी क्रममें कुछ और तथ्य जानेंगे । यह भी आपको क्यों बता रहे हैं ?; क्योंकि अनेक लोग अनेक वर्ष नामजप करते हैं; किन्तु उनकी आध्यात्मिक उपलब्धि कुछ नहीं होती है ! क्योंकि नामजप कुछ काल उपरान्त यन्त्रवत (मेकैनिकल) होने लगता है; अतः नामजप करते समय वह भावपूर्वक हो, इस हेतु कुछ प्रयास इसप्रकार करें ।
भावपूर्वक नामजप करने हेतु प्रयास (भाग – २)
नामजप करने हेतु एक निश्चित समय एवं निश्चित स्थान निर्धारितकर कुछ समय नेत्र बंदकर उसे प्रतिदिन करनेका प्रयास करना चाहिए ! अर्थात उसे दिनचर्यामें डालनेका प्रयास करना चाहिए । ऐसा करनेसे नामजपका संस्कार निर्माण होता है एवं उससे नामजपके प्रति प्रेम निर्माण होता है । प्रेमसे अपने आराध्यके प्रति भाव निर्माण होनेमें सहायता मिलती है ।
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