प्रतिष्ठामें प्राण गंवाना !


मुझे यह नहीं समझमें आ रहा है कि जब भारत शासनको पता ही था कि विदेशमें सर्वत्र ‘कोरोना वायरस’ फैला हुआ है तो इन्होंने सवा अरबकी जनसंख्याके साथ इतना बडा खिलवाड क्यों किया ?
 विदेशमें पढनेवाले विद्यार्थियों एवं पर्यटनके लिए गए लोगोंको वहीं छोडना चाहिए था ! इन लोगोंको अपने देशकी अपेक्षा विदेशकी सब बातें श्रेष्ठ लगती हैं तो उन्हें वहीं रहने देना चाहिए । विदेश प्रेमका भूत दो-चार महीनोंमें उतर जाता ! मोदी शासनने मात्र विश्वमें उनकी वाहवाही हो, इस हेतु यह आत्मघाती पग उठाए हैं, इसमें किंचित मात्र भी सन्देह नहीं है ।
यदि थोडा विचारकर सब निर्णय लिया होता तो आज मुट्ठीभर लोगोंके प्राण बचाने हेतु इतनी बडी जनसंख्याके ऊपर बन्दी डालनेकी स्थिति ही नहीं आती ! इसीको कहते हैं, ‘प्रतिष्ठामें प्राण गंवाना’ !


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