जनवरी ४, २०१८
प्रयागराजमें पारसी मजारोंके (कब्रगाहके) मध्य बनी फिरोज जहांगीर गांधीकी मजार आज भी अपनी पीढियोंकी प्रतीक्षा कर रही है । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीके दादाकी मजारकी देखरेख करनेवाले बाबूलालका कहना है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधीको अपने पूर्वजोंकी मजारपर आना चाहिए ।
फिरोज फिरोज गांधीकी मजारको लेकर विवाद तब खडा हुआ, जब उत्तर प्रदेशके उपमुख्यमन्त्री दिनेश शर्माने गुजरातमें एक वक्तव्यमें कहा था कि राहुल गांधीके दादा जी फिरोज जहांगीर गांधीकी मजार प्रयागराजमें है, जहां वो अब तक नहीं आए हैं ! वो अपने दादाजीकी मजारपर आएं और मोमबत्ती भी करें ताकि उनकी आत्माको शांति मिले ।
साथ ही राहुल गांधीके गोत्रका वर्णन करते हुए दिनेश शर्माने कहा था, “उनका दत्तात्रेय गोत्र है और इसलिए मैं उन्हें आमन्त्रण दे रहा हूं कि वो वहांपर आएं । यहां गोदान किया जाता है, जिससे पुरखोंकी आत्माको शांति मिले ।”
प्रयागराजमें पारसी मजारकी देख-रेख करने वाले बाबूलालने दिनेश शर्माके वक्तव्यका खण्डन करते हुए कहा कि राहुल गांधी इस मजारपर आए थे और १० साल पूर्व उन्होंने फूल-माला भी अर्पित की । यद्यपि बाबूलालका कहना है कि इस घटनाको १० वर्ष हो चुके हैं, फिरोज गांधी उनके दादा हैं, इसलिए राहुल गांधीको यहां आते रहना चाहिए ।
“संस्कार धर्मका मूल होते हैं, जो हमें अपने बडोंसे ही मिलते हैं । पारसी मुसलमान दादाके तथाकथित कौल ब्राह्मण पौत्र राहुल गांधीजी अपने दादाकी मजारपर उनकी मुक्ति कामना हेतु नहीं गए, क्योंकि वह धर्म संस्कार जो बडोंका मान, श्राद्ध, पिण्डदान आदि करना बताता है, वह इन तथाकथित ब्राह्मणको मिला ही नहीं है और जो परिवार अपने बडोंका मान भी न पाएं, वह देशका करेगा क्या ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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