प्रेरक प्रसंग -भस्मासुरको शिवका वरदान !


पूर्व कालमें भस्मासुर नामका एक राक्षस हुआ करता था । उसको समस्त विश्वपर राज करना था । अपने इसी प्रयोजनको सिद्ध करने हेतु वह शिवकी कठोर तपस्या करता है । अंतमें भोलेनाथ उसकी वर्षोंकी गहन तपस्यासे प्रसन्न होकर उसके समक्ष प्रकट होते हैं ।
शिव उसे वरदान मांगनेके लिए कहते हैं । तब भस्मासुर अमरत्वका वरदान मांगता है । अमर होनेका वरदान सृष्टि विरुद्ध विधान होनेके कारण शंकर भगवान उसकी यह मांग नकार देते हैं । तब भस्मासुर अपनी मांग बदलकर यह वरदान मांगता है कि वह जिसके भी सिरपर हाथ रखे वह भस्म हो जाए ।
शिवजी उसे यह वरदान दे देते हैं । तब भस्मासुर शिवजीको ही भस्म करने उनके पीछे दौड पडता है । जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भोलेनाथ, भगवान विष्णुकी शरणमें जाते हैं और उन्हे पूरी बात बताते हैं । तब भगवान विष्णु  भस्मासुरका अंत करनेके लिए मोहिनी रूप रचते हैं ।
भस्मासुर जब भटक भटककर शिवजीको भस्म करनेके लिए ढूंढ रहा होता है तब मोहिनी उसके समीप प्रकट हो आती है । उसकी सुंदरतासे मुग्ध होकर भस्मासुर वहीं रुक जाता है और मोहिनीसे विवाहका प्रस्ताव रख देता है । मोहिनी उत्तरमें कहती है कि वह केवल उसी युवकसे विवाह करेगी जो उसकी भांति नृत्यमें प्रवीण हो ।
अब भस्मासुरको नृत्य आता नहीं था तो उसने इस कार्यमें मोहिनीसे सहायता मांगी । मोहिनी तुरंत तैयार हो गई । नृत्य सिखाते-सिखाते मोहिनीने अपना हाथ अपने सिरपर रखा और उसकी देखा-देखी भस्मासुर भी शिवका वरदान भूलकर अपना ही हाथ अपने सिरपर रख बैठा और स्वयं ही भस्म हो गया । इस प्रकार विष्णु भगवानकी सहायतासे भोलेनाथकी विकट समस्याका हल हो जाता है ।


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