प्रेरक प्रसंग – नामजपकी महत्ता


एक बारकी बात है, राजा एवं महामन्त्रीने मार्गमें किसी ब्राह्मणको भिक्षा मांगते देखा ।
राजाने महामन्त्रीसे पूछा : यह क्या है ?
महामन्त्रीने तत्काल कहा : महाराज ! भूला हुआ है ।
राजाने कहा : तो इस पण्डितको पथपर लाओ ।
महामन्त्रीने कहा : आ जाएगा, राजन ! परन्तु समय लगेगा । कृपया तीन माहकी अवधि दीजिए । राजाने स्वीकृति दे दी । सन्ध्याको महामन्त्री ब्राह्मणके घर गया और ब्राह्मणसे विद्वान होते हुए भी भिक्षा मांगनेका कारण पूछा । ब्राह्मणके बतानेपर महामन्त्रीने कहा, “कलसे प्रात: आप चार बजे जाग जाएं और मेरे लिए दो घण्टे `हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे`, यह नामजप करें, सन्ध्याको एक स्वर्ण मुद्रा प्रतिदिन आपके घर पहुंचा दी जाएगी ।”
     ब्राह्मणको पहले तो यह सुनकर आश्चर्य हुआ; किन्तु मन ही मन सोचा कि ऐसा करनेमें क्या आपत्ति है । जप करना स्वीकार कर लिया । पिछले जन्मके कुलके संस्कार शुभ थे । इसी कारण चार बजे उठने और नामजप करनेमें कोई कठिनाई नहीं हुई । प्रतिदिन सन्ध्याको एक स्वर्ण मुद्रिका मिल जानेसे धीरे-धीरे ब्राह्मण धनवान हो गया । अभ्यास करते-करते राम-कृष्ण नामके दिव्य संस्कारोंने दबे हुए सुसंस्कारोंको उभारा । एक दिवस ब्राह्मणने सोचा कि यदि महामन्त्रीके लिए नाम-जपने मुझे धनाढ्य बना दिया है, तो स्वयंके लिए जपनेसे तो लोक और परलोक दोनों समर्थ हो जाएंगे । ऐसा सोचकर प्रतिदिन स्वयंके लिए भी दो घण्टे जप करने लगा । भगवान नामकी ऐसी कृपा हुई कि ब्राह्मणकी कामनाएं समाप्त होने लगी और एक दिन ब्राह्मणने महामन्त्रीसे कहा कि आप कृपया सोनेकी मुद्रिका न भेजें,  मैं अब केवल अपने लिए ही जप करूंगा । प्रभु नामकी उपासनाने मेरा विवेक एवं वैराग्य जाग्रत कर दिया है,  प्रभु भक्तिकी लग्न लग गई है ।
अब ब्राह्मण देवता सतत प्रभु स्मरणमें रंग गए । साधना फलने-फूलने लगी । लोग दर्शनार्थ पधारने लगे । धीरे-धीरे बात राजातक पहुंची तो राजा भी एक दिन महामन्त्रीके साथ महात्माके दर्शन करने पधारे ।
    लौटते समय राजाने कहा, “महात्मन्, मैं भारतका राजा आपसे प्रार्थना करता हूं, यदि आपको किसी वस्तुकी आवश्कता पडे तो नि:संकोच सन्देश भिजवाइएगा, वस्तु तत्काल मिलेगी ।”
ब्राह्मण देवता मुस्कुराए और बोले, “राजन आपके पास ऐसा कुछ भी नहीं, जिसकी मुझे आवश्यकता हो । हां, यदि आपको कुछ चाहिए तो मांगनेमें संकोच न करिएगा !”
महामन्त्रीने कहा, “राजन आपने ‘पहचाना’ इनको ? ये वही ब्राह्मण हैं, जो तीन माह पूर्व भिक्षा मांग रहे थे । प्रभु नामके जपने एक भिखारीको सच्चा दाता बना दिया है ।” यह सुनकर राजा बडे विस्मित हुए । ये है नामजपका प्रभाव, जो भिखारीसे सच्चा दाता बना दे ।


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