‘एससी/एसटी एक्ट’के विरोधमें मतदान बहिष्कारके पट-विज्ञापन (होर्डिंग) लगे !


सितम्बर १०, २०१८

‘अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम’के (एससी/एसटी एक्ट) अन्तर्गत तुरन्त बन्दी बनानेके प्रावधानके विरोधमें प्रधानमन्त्री मोदी शासनके पगके विरोधमें बलिया प्रान्तके सोनबरसा गांवमें लोगोंने पट-विज्ञापन (होर्डिंग) लगाए है । प्रान्तीय मुख्यालय से लगभग ३८ किलोमीटर दूर बैरिया-दलनछपरा मार्गपर स्थित सोनबरसा गांवके प्राथमिक विद्यालयके सामने गांवके प्रवेश द्वारपर लगे पट-विज्ञापन चर्चाका विषय बना हुआ है । पट-विज्ञापनपर लिखा हुआ है, ‘‘यह गांव सामान्य वर्गका है । कृपया राजनीतिक दल वोट मांगकर लज्जित न करें, हम अपना वोट ‘नोटा’को (किसी भी उम्मीदवारको नहीं) देंगे !’’

सवर्णोंका विरोध
इस अनोखे विरोध प्रदर्शनकी अध्यक्षता गांवके सामान्य वर्गके युवा कर रहे हैं । इसमें सम्मिलित रॉकी सिंहका कहना है कि ‘एससी/एसटी एक्ट’के अन्तर्गत आरोपीको तुरन्त बन्दी बनानेका प्रावधान समाप्त करनेका न्यायालयका निर्णय न्याय हितमें था; लेकिन कुछ राजनीतिक दलोंने न्यायालयके निर्णयको परिवर्तित अधिनियमकेद्वारा भयादोहन (ब्लैकमेल) करनेका साधन उपलब्ध करा दिया है । इसी गांवके रहने वाले विशाल मिश्रने कहा कि राजनीतिक दलोंके लिए साधारण लोगोंका हित और सरोकार कोई अर्थ नहीं रखता, उन्हें केवल सत्तामें बने रहनेकी ही चिन्ता है ।

बैरिया क्षेत्रके बीजेपी विधायक सुरेन्द्र सिंह कहते हैं कि युवाओंकी भावनाएं उचित हैं; लेकिन वह विरोध कर रहे युवाओंसे ‘नोटा’का प्रयोग नहीं करनेकी विनती करेंगे । उन्होंने इसके साथ ही कहा कि यदि सवर्ण वर्गके लोगोंने ‘नोटा’का प्रयोग कर दिया तो आगामी लोकसभा मतदानमें भाजपाको उत्तर प्रदेशमें भारी हानि उठानी पडेगी । उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक दलोंको न्यायालयके निर्णयका सम्मान करना चाहिए ।

शासनके निर्णयके विरुद्ध गत दिवसों सवर्ण समाजसे सम्बन्धित संगठनोंने भारत बन्दकी घोषणा की थी । मध्‍य प्रदेश लेकर बिहारतक इसका प्रभाव भी देखनेको मिला था ।

इस मध्य ‘अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम’के विरुद्ध बोलने वाले द्वारका-शारदापीठ और ज्योतिषपीठके शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वतीने रविवारको मथुरामें कहा कि आरक्षणको पूर्ण रूपसे समाप्त कर दिया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि इसके स्थानपर समाजके हर वर्गको उन्नतिका समान अवसर देकर समाज सेवाके योग्य बनाया जाना चाहिए, तभी सभी की भलाई सम्भव है । स्वामीने कहा कि जिन्हें शिक्षा, चाकरी, प्रगति सभीमें आरक्षणकी विशेष सुविधा मिल रही हो, उन्हें कोई क्या परेशान कर पाएगा ? उन्होंने पूछा कि जब वे आरक्षणका लाभ उठाकर उच्च पदोंपर बैठे हैं, तो क्या उन्हें परेशान कर पाना सम्भव भी है ! उन पर कोई कैसे अत्याचार करेगा ? नेताओंको प्रत्येक व्यक्ति, वर्गके कल्याणके लिए सोचना चाहिए, न कि केवल किसी वर्ग विशेषके लिए !

 

“शासनकी अनुचित नीतियोंका सभीने ऐसे ही मुखर होकर विरोध करना चाहिए, अन्यथा जनताको राष्ट्रद्रोही नेता केवल हाथोंकी कठपुतली मात्र समझते हैं” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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