पुदीनेके औषधीय गुण


पुदीनेका उपयोग वैसे तो सम्पूर्ण वर्ष भारत भर लोग किसी न किसी रूपमें करते हैं किन्तु ग्रीष्मकालमें पुदीनेका उपयोग अधिक किया जाता है अतः आज हम पुदीनेके औषधीय पक्षके विषयमें जानेंगे । पुदीनेका (पूतिहा) मूल उत्पत्ति स्थान भूमध्य सागरीय प्रदेश है; परन्तु आज विश्वके अधिकांश देशोंमें इसका उत्पादन हो रहा है । भारतके लगभग सभी प्रदेशोंमें पुदीना उगाया जाता है । साधारण सा दिखनेवाला यह पौधा अपने आपमें बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है । यह चिकित्सा जगतमें प्रचलित रूपसे गन्धचिकित्सामें (अरोमाथेरपी) उपयोग किया जाता है । पुदीनेका प्रयोग पत्ते, तेल, चाय आदिके रूपमें किया जाता है । पुदीना शरीर और मनपर ठन्डा और शान्त प्रभाव छोडता है, जिसका मुख्य कारण इसमें विद्यमान पुदीना सत्त (मेन्थॉल) है ।

यह जडी बूटी मैंगनीज, ताम्बा और विटामिन सीका एक प्रमुख स्रोत है । इसके अतिरिक्त यह ऑक्सीकरण रोधी (एंटीऑक्सीडेंट), जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी (एंटीवायरल) आदि गुणोंके लिए भी जाना जाता है ।
पुदीनेके कुछ औषधीय गुण इसप्रकार हैं :

  • शीतप्रकोप (सर्दी जुकाममें) लाभप्रद :- शीतप्रकोप, पुराना नजला आदि रोगोंमें पुदीनेके  रसमें  काली मिर्च और थोडा सा काला नमक मिलाकर, इसको चायके समान उबालकर पीनेसे शीतप्रकोप और खांसी व ज्वरमें अति शीघ्र लाभ मिलता है ।
  • मुखेके दुर्गन्ध दूर करनेमें लाभप्रद – मुखसे दुर्गन्धकी समस्या दूर करनेमें पुदीना अत्यधिक उपयोगी है । इसके लिए आप पुदीनेकी सूखी पत्तियोंका चूर्ण बना लें और इसका मन्जनके समान प्रयोग करें ।  ऐसा करनेसे आपके मसूडे स्वस्थ होंगे और आपके मुखसे दुर्गन्ध आना पूर्णत: समाप्त हो जाएगा । इस प्रयोगको आप कमसे कम २ सप्ताह या अधिकसे अधिक १ माह तक कर सकते हैं ।
  • तेज गर्मीमें लाभप्रद :- गर्मीके कारण घबराहट होनेपर एक चम्मच सूखे पुदीनेकी पत्तियां और आधा छोटा चम्मच इलायचीका चूर्ण एक गिलास जलमें उबालकर,  ठंडा होनेके पश्चात पीनेसे लाभ मिलता है और साथ ही विसूचिकामें (हैजामें)  प्याजका रस और नींबूका रस पुदीनाके साथ बराबर मात्रामें मिलाकर पीनेसे लाभ मिलता है । गर्मीके दिनोंमें पुदीनेका प्रयोग भिन्न प्रकारसे करते हैं, जैसे — गन्नेके रसमें, आमका पन्ना बनानेमें, भोजनमें आदि । इनका सेवन करनेसे शरीरमें नमी बनी रहती है साथ ही उल्टी,विसूचिका (हैजा) जैसी समस्या भी नहीं होती ।
  • उदर वेदना (पेट दर्द) दूर करने हेतु  मलावरोध होनेपर या पेटमें वेदना होनेपर पुदीनेको पीसकर जलमें मिला ले और छाननेके पश्चात बने रसको पिएं । इससे उदर सम्बन्धी विकार दूर होते है और पाचन शक्ति बढती है ।
  • हड्डियोंको सख्त(मजबूत) बनानेमें लाभप्रद पुदीनाका सेवन करनेसे हड्डियां सशक्त होती है । पुदीनेमें पाए जानेवाला मैग्निशियम तत्व हड्डियोंको सशक्त बनाता है ।
  • पैतव (कोलेस्ट्रोल) न्यून करनेमें सहायक  पुदीनाका नित्य सेवन शरीरके बढे हुए पैतव(कोलेस्ट्रोल)के स्तरको कम करता है । यह पुदीनेमें पाए जानेवाले रेशे (फाइबर)के कारण सम्भव होता है ।
  • त्वचाकी देखभाल करनेमें सहायक पुदीनेको पीस कर चेहरेपर लगानेसे या पिसे हुए पुदीनेमें मुल्तानी मिट्टी मिला कर चेहरेपर लगानेसे चेहरेकी त्वचा चमकदार बनती है।
  • चोट (घाव) ठीक करनेमें लाभप्रद पुदीनाकी पत्तियोंको मसल कर चोट (घाव) या फोडेपर लगानेसे चोट (घाव) या फोडा शीघ्र ठीक हो जाता हैं; क्योंकि पुदीनेमें जीवाणुरोधी (एंटी – बैक्टिरियल) एवं एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होता है।
  • उल्टी या हिचकी रोकनेमें सहायक – पुदीनाका रस दिनमें दो बार एक एक चम्मच लेनेसे उल्टीमें लाभ मिलता है । हिचकीमें पुदीनाका उपयोग लाभकरी होता हैं ।
  • अतिसार (दस्त)में उपयोगी – पुदीनेको पीसकर प्राप्त रस को १ चम्मचकी मात्रामें लेकर १ कप पानीमें डालकर लिया जा सकता है ।
  • गर्भवती स्त्रीका जी मिचलाना : पुदीनेका रस लगभग ३० मिलीलीटर प्रत्येक ६ घण्टेपर गर्भवती स्त्रीके द्वारा सेवन करनेसे जी मिचलाना बन्द हो जाता है ।
  • मासिक धर्मकी अनियमितता : पुदीनेकी चटनी कुछ दिन तक लगातार खानेसे मासिक धर्मकी अनियमितता दूर हो जाती है ।
  • कफमें लाभप्रद – चौथाई कप पुदीनेका रस चौथाई कप गर्म जलमें मिलाकर दिनमें ३ बार लेनेसे कफमें लाभ होता है ।
  • जहरीले कीडो के काटनेपर –  पुदीनाके पत्तोंको पीसकर किसी जहरीले कीडेके द्वारा काटे हुए अंग (भाग)पर लगाएं और पत्तोंका रस २ -२ चम्मचकी मात्रामें दिनमें ३ बार रोगीको पिलानेसे लाभ मिलता है ।
  • प्रसव वेदना जंगली पुदीना और हंसराज दोनोंको थोडी-थोडी मात्रामें लेकर काढा बनाकर इसमें थोडीसी मिश्री मिलाकर सेवन करनेसे प्रजननमें वेदना नहीं होती ।
  • मूत्ररोगमें लाभप्रद – २ चम्मच पुदीनेकी चटनी शक्करमें मिलाकर भोजनके साथ खानेसे मूत्ररोगमें लाभ होता है ।
  • घुटनोंकी वेदना – गठियाके रोगीको पुदीनेका काढा बनाकर देनेसे मूत्र खुल कर आता है और घुटनोंकी वेदना न्यून होती है ।
  • वायु विकार(गैस) – ४ चम्मच पुदीनेके रसमें १ नींबूका रस और २ चम्मच शहद मिलाकर पीनेसे वायु विकारमें लाभ मिलता है। सवेरे १ गिलास जलमें २५ मिलीलीटर पुदीनेका रस और ३० ग्राम शहद मिलाकर पीनेसे वायु-विकार समाप्त हो जाती है । २० मिलीलीटर पुदीनाका रस, १० ग्राम शहद और ५ मिलीलीटर नींबूके रसको मिलाकर खानेसे पेटके वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं । पुदीनेकी पत्तियोंका २ चम्मच रस, आधा नींबूका रस मिलाकर पीनेसे वायु विकारमें लाभ होता है ।
  • बालोंके लिए उपयोगी पुदीना बालोंके विकासके लिए लाभप्रद है । यह सिरकी त्वचाके पी.एच. स्तरको भी सन्तुलनमें रखता है ।
    बालोंके विकासमें वृद्धि लानेके लिए पुदीनेके तेलकी कुछ बूंदे जैतूनके तेल, नारियल तेल या किसी भी अन्य तेलमें मिलाएं। इस मिश्रणसे बालों और सिरकी मर्दन(मालिश) करें और कमसे कम ४५ मिनिटके पश्चात अपने बालोंको धोएं। इस प्रक्रियाको हर सप्ताह एक या दो बार करें ।

सावधानियां – पुदीना धातुके लिए हानिकारक होता है। पित्तकारक प्रकृति होनेके कारण पित्त प्रवृतिके लोगोंको पुदीनेका सेवन कम मात्रामें यदा-कदा ही करना चाहिए ।



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