मार्च २, २०१९
१४ फरवरीको ‘सीआरपीएफ’के सैनिकोंपर हुए आक्रमणके पश्चात समूचे देशमें सुरक्षाके कारण कडी जांच हो रही है । संदिग्धोंको पकडा जा रहा है और उनसे आवश्यक पूछताछ निरन्तर चल रही है । देवबंदमें ‘जैश’के दो आतंकी पकडे जानेके पश्चात समाचार आ रहा हैं कि पुलवामा आक्रमणका सम्बन्ध बिहारके बांकाके बाघा शंभूगंज थाना क्षेत्रके बेलारी गांवसे हैं, जहां रेहान नामक युवकको बन्दी बनाया गया है । बताया जा रहा है कि रेहान (संदिग्ध आतंकी) इससे पूर्व २००१ में हुए संसदपर आतंकी आक्रमणमें भी सम्मिलित था और अभी उसके घरमें ५०० किलो ‘आरडीएक्स’की सूचना गुप्तचर विभागको प्राप्त हुई है ।
‘हिन्दुस्तान’में प्रकाशित ब्यौरेमें बताया गया है कि गुप्तचर विभागकी सूचनाके आधारपर रेहान जैशके मुखिया मसूद अजहरसे जुडा हुआ है और उसके घरकी एक वृद्ध महिला भी आत्मघाती आक्रमणकारी बन चुकी है, जो उचित अवसरकी प्रतीक्षा कर रही है !! अनुमान लगाया जा रहा है कि उसके लक्ष्यपर कोई बडा नेता भी हो सकता है । सुरक्षा विभागके अनुसार मोहम्मद रेहान अभी पटनामें आयोजित प्रधानमन्त्रीकी किसी रैलीमें घटनाको करनेकी योजना बना रहा था !!
इसकी सूचना किसी अज्ञातने सुरक्षा विभागको दी, जिसके पश्चात हडकम्प मच गया । रेहानके अतिरिक्त पुलिसको गांवके दो और युवकोंकी खोज है । इनमेंसे एकका नाम मोहम्मद नौशाद है, जोकि अभी भागा हुआ है ।
“रेहान, नौशाद, अब्दुल, अफजल और भी जाने कितने नाम उजागर हुए हैं, जो इस राष्ट्रको नष्ट करना चाहते हैं, आजतक युवा पकडे जा रहे थे और अब वृद्ध महिलाओंने भी जिहाद आरम्भ कर दिया है, उसके उपरान्त भी हम नेत्र खोलकर आतंकका धर्म देखनेको सज्ज नहीं हैं ! तो यह हमारे लिए ही हानिकारक सिद्ध होगा ! अभीतक ये नागरिकोंको लक्ष्य बनाते थे, अब सीधा प्रधानमन्त्रीको बनाना चाहते हैं, यह अवश्य चिन्तनका विषय है ! अब प्रायः प्रत्येक दिवस यह समाचार सुननेको मिलता है कि कोई न कोई धर्मान्ध आतंकी पकडा जाता है, तो क्या ऐसेमें भारतका इन्हें संरक्षण देना आवश्यक है ? ऐसा संरक्षण और भाईचारा किस कामका है, जो एक-एक कर सभी राज्योंका भक्षण कर रहा हो !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्ट पोस्ट
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