फरवरी १६, २०१९
पुलवामामें हुए आतंकी आक्रमणमें ‘सीआरपीएफ’के ४० सैनिकोंके हुतात्मा होनेसे देशमें क्रोध और दुःखका वातावरण है । अब एक विवरणमें उजागर हुआ है और पुलवामा आतंकी आक्रमणमें सुरक्षाके स्तरपर चूक हुई है । ‘सीआरपीएफ’के एक सैनिकने पहचान उजागर ना करनेकी उपालम्बपर (शर्तपर) ‘द क्विंट’के साथ वार्तामें बताया कि ‘सीआरपीएफ’ने आक्रमणसे सप्ताह पूर्व ही गृह मन्त्रालयसे सैनिकोंको हवाई मार्गसे श्रीनगर भेजनेकी मांग की थी; परन्तु गृह मन्त्रालयने इस मांगपर ध्यान नहीं दिया ! समाचारके अनुसार, श्रीनगरमें तैनात ‘सीआरपीएफ’के एक वरिष्ठ अधिकारीने इस सम्बन्धमें मुख्य कार्यालयको लिखा था, जिसके पश्चात ‘सीआरपीएफ’ने यह मांग गृह मन्त्रालयको भेज दी थी ।
विवरणके अनुसार, सीआरपीएफकी ओरसे इससे पूर्व भी सैनिकोंको हवाई मार्गसे लानेकी मांग की गई थी; परन्तु इसे स्वीकार नहीं किया गया । ‘सीआरपीएफ’के एक वरिष्ठ अधिकारीने ‘द क्विंट’के साथ वार्तामें बताया कि ‘बहुतसे सैनिक बर्फबारीके कारण रास्ते बंद होनेके चलते जम्मूमें फंस गए थे । ४ फरवरीको भी सैनिकोंका एक दल निकला था । यद्यपि ‘सीआरपीएफ’ मुख्य कार्यालयको पत्र लिखकर मांग की गई थी कि सैनिकोंको हवाई मार्गसे ले जाया जाए; परन्तु कुछ नहीं हुआ और किसीने हमारी मांगका उत्तरतक देनेका प्रयास नहीं किया !”
विवरणके अनुसार, ८ फरवरीको गुप्तचर विभागने भी ‘सीआरपीएफ’ अधिकारियोंको एक पत्र लिखकर आतंकी आक्रमणके प्रति चेताया था । यद्यपि गुप्तचर विभागने आईडी विस्फोटको लेकर सूचना दी थी और शेष जानकारी नहीं दी थी । ‘सीआरपीएफ’के सेवानिवृत्त वीपीएस पंवारका कहना है कि इसप्रकारके आतंकी आक्रमण सुरक्षा व्यवस्थाकी असफलताको दिखाते हैं और ऐसा लगता है कि वरिष्ठ अधिकारियोंने गुप्तचर विभागकी सूचनापर ध्यान नहीं दिया ! पंवारने कहा कि ‘सीआरपीएफ’को बुलेट प्रूफ वाहन उपलब्ध कराए जाने चाहिए और साथ ही सैनिकोंको हवाई मार्गसे पहुंचानेकी व्यवस्था होनी चाहिए । विशेषतया तब, जब अधिक सैनिक यात्रा कर रहे हो ।
‘सीआरपीएफ’ अधिकारीने बताया कि साधारणतया दलमें ३००-४०० से अधिक सैनिक नहीं होते हैं । एक साथ ७८ वाहनोंका दल एकप्रकारसे आतंकियोंके लिए सरल लक्ष्य था । इतनी अधिक संख्यामें सैनिकोंको स्थानान्तरित करना उचित निर्णय नहीं था ।
“इससे स्पष्ट है कि चूक शासनसे हुई है और यह चूक नहीं अपराध है और इतना बडा कि क्षम्य नहीं है और अधिकारियोंकी संवेदनहीनता व अदूरदर्शिताको दिखाता है ! जब स्पष्ट बताया गया था कि आतंकी आक्रमणकी शंका है और एक साथ ३०० से अधिक सैनिक नहीं स्थानान्तरित किए जाते हैं तो क्यों हवाई मार्गसे नहीं भेजा गया ? शासन सैनिकोंके प्रति इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है ? सम्भवतः अब सत्ता नहीं व्यव्स्था परिवर्तनका समय है । जब शासकगणोंके स्वयंके पुत्र सेनामें होंगें तब उन्हें संवेदनाका ज्ञान होगा कि हमारे सैनिक गाजर-मूली नहीं है ! जब किसी नेताका पुत्र सेनामें अपने प्राण खोएगा तो ऐसी संवेदनहीनता समाप्त होगी ! ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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