पुनः राष्ट्रनिर्माण सरल नहीं !


इस देशकी सुरक्षामें नियुक्त सुरक्षाकर्मी एवं गुप्तचर विभागने कुम्भमें रासायनिक आक्रमणकी तैयारी कर रहे धर्मांध आतंकवादियोंको बंदी बनाया है ! क्या अब भी कहेंगे कि आतंकवादियोंका कोई धर्म नहीं होता है ? जब भी इस देशमें कोई राष्ट्रीय पर्व या हिन्दुओंका सार्वजानिक उत्सव तो उससे पूर्व कुछ धर्मान्ध आतंकवादी आक्रमण करनेकी पूर्व तैयारीके क्रममें अवश्य ही पकडे जाते हैं । भला हो हमारे कर्तव्यनिष्ठ, सतर्क, राष्ट्रनिष्ठ तथा जागरूक गुप्तचर और सुरक्षा विभागका, नहीं तो यहां अफगानिस्तान जैसी स्थिति अभीतक धर्मान्धोंने निर्माण कर दी होती !
   अच्छा होता इस देशमें स्वतन्त्रताके समय भारत विशुद्ध हिन्दुओंका देश बन जाता ! हमारे देशकी शक्तिका एक बडा भाग मात्र धर्मान्धोंसे आन्तरिक सुरक्षामेंं व्यय हो जाता है, इसे तो इस देशके सभी बुद्धिजीवीको मानना ही पडेगा ! और अब तो इनकी जडें इतनी फैल चुकी है कि इन राष्ट्रद्रोहियोंका साथ देनेवाले इतने पापी उत्पन्न हो चुके हैं कि भारतको पुनः विशुद्ध ‘हिन्दुस्तान’ बनाने हेतु एक और संग्राम लडना होगा, जो अंग्रेजोंके विरुद्ध संग्रामसे बहुत विनाशकारी होगा ! महाभारतका युद्ध तो यही सन्देश देता है और यह इस देशमें होनेवाली साम्प्रतकालीन घटनाएं भी यही संकेत दे रही हैं, जो निश्चित ही शुभ नहीं कही जा सकती हैं ।



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