पंजाब बना देशका प्रथम चलभाष विनियोग (मोबाइल ऐप)केद्वारा निशुल्क पौधे देने वाला राज्य


अगस्त १९, २०१८

पंजाबके वन मन्त्री साधु सिंह धर्मसोतने रविवारको कहा कि पंजाब देशमें चलभाष विनियोग (ऐप) ‘आई-हरियाली’केद्वारा निशुल्क पौधे आपूर्ति करने वाला प्रथम राज्य है ! पंजाबने इस प्रयासकेद्वारा अब तक १३ लाख पौधे लोगोंको उपलब्ध कराए हैं । उन्होंने कहा कि इससे ३२५००० ऑनलाइन निवेदन प्राप्त हुए हैं । इसे तीन लाखसे अधिक लोगोंने स्मार्टफोनपर डाउनलोड किया है । मन्त्रीने कहा कि कुल ३२ लाख पौधोंकी ‘घर-घर हरियाली’ अभियान व विनियोगकेद्वारा आपूर्तिकी गई है । धर्मसोतने लोगोंसे पौधरोपण करने व विशेष अवसरपर जैसे जन्मदिवसपर पौधे वितरणका आग्रह किया है ।

नीति आयोगके उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढियाने कुल सकल घरेलू उत्पादमें (जीडीपी) तुलनात्मक रूपसे कृषि क्षेत्रके अल्प योगदानको लेकर चिन्ता जतायी और दूसरी हरित क्रान्ति लानेके लिए इस क्षेत्रमें सुधारका आह्वान किया । एक आधिकारिक विज्ञप्तिके अनुसार पनगढिया कृषि विकासपर कार्यबलकी बैठककी अध्यक्षताके लिए गांधीनगरमें थे । इन कार्यबलोंका गठन मध्य एवं पश्चिमी क्षेत्रके राज्योंने किया है । उन्होंने कहा कि यद्यपि देशकी ४९ प्रतिशत जनसंख्या कृषिसे सम्बन्धित है; लेकिन उनका कुल जीडीपीमें योगदान १५ प्रतिशत ही है ।

विज्ञप्तिमें उनके सन्दर्भसे कहा गया है, “यह समय कृषि क्षेत्रको महत्त्व देनेका है । द्वितीय हरित क्रान्तिके लिए हमें क्षेत्रके विभिन्न भागों जैसे भूमि, कृषि, बीज आदिमें सुधार लाना होगा ।’ बैठकमें गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, गोवा, केन्द्र शासित दादरा एवं नागर हवेली तथा दमन एवं दीवके ऐसे कार्यबलके प्रमुख सम्मिलित हुए ।

वैज्ञानिकोंने पौधेके संवहन तन्त्रमें परिपथ (सर्किट) लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक पौधेका निर्माण किया है । इससे विज्ञानके क्षेत्रमें नूतन युगका आरम्भ हो सकता है । स्वीडनके लिकोम्पिंग विश्वविद्यालयके शोधकर्ताओंके दलने पौधोंके अन्दर लगाए गए तारों, ‘डिजिटल लॉजिक’ और प्रदर्शनकारी तत्वोंको दिखाया गया है, जो ‘आर्गेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स’के नूतन अनुप्रयोगों और वनस्पति विज्ञानमें नूतन उपकरण विकसित करनेमें सहायक हो सकते हैं ।

‘उमीआ प्लांट साइंस सेण्टर’के निदेशक और प्लाण्ट रिप्रोडक्शन बायलॉजीके प्राध्यापक ओव निल्सनने कहा, इससे पहले वैज्ञानिकोंके पास जीवित पौधेमें विभिन्न अणुओंके सकेन्द्रणको मापनेके लिए कोई अच्छा उपकरण नहीं था; लेकिन इस शोधके पश्चात हम पौधोंका विकास करने वाले उन विभिन्न पदार्थोकी मात्राको प्रभावित करनेमें सक्षम हैं ।

शोधकर्ताओंने कहा, पौधोंमें रासायनिक मार्गोपर नियन्त्रणसे प्रकाश संश्लेषण आधारित ईंधन सेल, सेंसर्स (ज्ञानेन्द्रियों) और वृद्धि नियामकोंके लिए राह खुल सकती है । इसके साथ ही ऐसे उपकरण भी तैयार किए जा सकते हैं, जो पौधोंकी आन्तरिक क्रियाओंको व्यवस्थित कर सकें । उन्होंने कहा, यह सफलता वनस्पति विज्ञान और ‘ऑर्गेनिक साइंस’के विविध क्षेत्रोंके विलयकी ओर प्रथम पग है । हमारा उद्देश्य उर्जाकी सहायतासे पर्यावरण और वनस्पति विज्ञानके नूतन रास्तोंको खोजना है । यह अध्ययन ‘साइंस एडवांसेज’ नामक पत्रिकामें प्रकाशित हुआ है ।

स्रोत : जी न्यूज



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