अमृतसरमें ‘ऑक्सीजन’की न्यूनतासे ६ रोगी मृत
२५ अप्रैल, २०२१
पंजाबके अमृतसरमें शनिवारको ‘ऑक्सीजन’की न्यूनताके कारण कोविड-१९ से पीडित छह गम्भीर रोगियोंकी मृत्यु हो गई, जिसका चिकित्सालय प्रशासनने इस प्रकरणका दोष जनपद प्रशासनपर ये कहते हुए मढा है कि उसने ‘ऑक्सीजन’की आपूर्तिके लिए शासकीय (सरकारी) चिकित्सालयोंको प्राथमिकता दी । चिकित्सालय प्रबन्धनद्वारा पीडित परिवारोंको ‘ऑक्सजीन’की न्यूनताके विषयमें पूर्वसूचित किया गया था और उन्हें किसी अन्य चिकित्सालयमें स्थानान्तरित किए जानेका विकल्प दिया गया था ।
पंजाब प्रशासनने निजी चिकित्सालयोंद्वारा आरोपोंपर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि प्रशासन बिना किसी पूर्वाग्रहके निजी चिकित्सालयोंको ‘ऑक्सीजन’की आपूर्ति कर रहा है और शुक्रवार रातको शासकीय चिकित्सालय ‘ऑक्सीजन’की न्यूनतासे जूझ रहे थे । अमृतसरके उपायुक्त गुरप्रीत सिंह खैराने भी चिकित्सालयको उचित समयपर उचित पग न उठाने हेतु उत्तरदायी ठहराया । शुक्रवारको निजी चिकित्सालयोंके साथ हुई बैठकमें नीलकण्ठ चिकित्सालयद्वारा ‘ऑक्सीजन’के अभावकी घोषणापर प्रतिक्रिया देते हुए खैराने कहा, ”हमने निजी चिकित्सालयोंसे कहा था कि यदि उनके पास ‘ऑक्सीजन’की न्यूनता है तो वे किसी भी गम्भीर स्थितिसे पीडित रोगियोंको प्रविष्ट न करें, जिन्हें ‘ऑक्सीजन’की आवश्यकता है; क्योंकि हम जीएमसीएचके (शासकीय मेडिकल कॉलेज चिकित्सालयोंके) लिए केवल कुछ ‘सिलिंडरों’की व्यवस्था कर सकते हैं, जहां अधिक रोगी प्रविष्ट हैं ।” अमृतसरके ‘सिविल सर्जन’ चरनजीत सिंहने प्रकरणकी जांचका विश्वास दिलाते हुए कहा कि भविष्यमें ऐसी घटनाओंको नहीं होने दिया जाएगा ।
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था कोरोना प्रकोपके समक्ष पूर्णरूपेण असक्षम दिखाई दे रही है । इससे ही सिद्ध होता है कि हमारा देश पिछले वर्षकी महामारीके आघातसे कुछ नहीं सीख पाया है, यह सब राजनेताओं एवं प्रशासनिक तन्त्रकी अकार्यक्षमताको दर्शाता है ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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