जम्मू और कश्मीरमें ४० वर्षसे रह रहे पंजाबीकी आतड्कियोंने गोली मारकर की हत्या, कुछ मास पूर्व ही मिला था स्थायी निवास प्रमाणपत्र
०२ जनवरी, २०२१
जम्मू-कश्मीरमें एक ७० वर्षीय पंजाबी स्वर्णकारकी (ज्वैलरकी) श्रीनगरके मध्य ‘बाजार’में गोली मारकर हत्या कर दी गई । घटना श्रीनगरके सराई बाला क्षेत्रकी है । गुरुवार, ३१ दिसम्बर २०२० को दोपहिया वाहनपर आए आतड्कवादियोंने स्वर्णकारपर गोली चलाई । मृतक पिछले चार दशकसे जम्मू-कश्मीरमें रह रहे थे । कुछ मास पूर्व ही उन्हें स्थायी निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) मिला था; इसलिए उन्होंने एक घर और ‘दुकान’ भी क्रय किए थे ।
मूल रूपसे अमृतसरसे सम्बन्ध रखनेवाले सतपाल निश्छलकी हत्याका दायित्व पाकिस्तान समर्थित आतड्की सङ्गठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ने लिया है । इस घटनाको लेकर ‘फेसबुक’पर ‘पोस्ट’ करते हुए ‘TRF’ने कहा है, “डोमिसाइलसे जुडा नूतन विधान अस्वीकार्य है । मूल कश्मीरियोंके अतिरिक्त यहां सम्पत्ति बनानेवाले हर किसीके साथ ‘अधिकार करनेवाले’की भांति व्यवहार किया जाएगा । अभी बहुत कुछ होना शेष है ।”
इस आतड्की सङ्गठनका नाम प्रथम बार मार्च २०२० में सामने आया था । यह स्वयंको ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ’ जम्मू-कश्मीर कहता है, जो कि बादमें ‘TRF’ बना । ये प्रतिबन्धित आतड्की सङ्गठनों ‘जैश-ए-मोहम्मद’, ‘लश्कर-ए-तैय्यबा’ और हिजबुल मुजाहिद्दीनसे भी जुडा हुआ है । ‘डोमिसाइल’से जुडा नया विधान प्रभावी होनेके पश्चात निश्छल पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें इस प्रकार लक्ष्य बनाया गया है । वह श्रीनगर स्थित ‘निश्छल ज्वैलर्स’के स्वामी भी थे । समाचारके अनुसार, उनके हृदयपर तीन गोलियां आतड्कियोंने मारी थीं ।
उनके एक पारिवारिक मित्रसे ज्ञात हुआ है कि सराई बाला क्षेत्रमें स्थित उनकी ‘दुकान’ उचित मूल्यपर आभूषणोंके विक्रयके कारणसे विख्यात थी । सतपाल निश्छलके दो पुत्र और एक पुत्री हैं । उनपर गोली चलानेवाले आतड्कवादियोंने इस घटनाको क्रियान्वित करनेके पश्चात ‘ग्रेनेड’ भी फेंका था, जिसमें एक ‘सीआरपीएफ सब इंस्पेक्टर’ चोटिल हो गए । वे घटनाके समय दक्षिण कश्मीरके अनंतनाग जनपद स्थित संड्गम क्षेत्रमें ‘पेट्रोलिंग’ कर रहे थे ।
पाकिस्तानमें अनेक प्रतिबन्धित आतंड्की सङ्गठन अभी भी व्याप्त हैं, जो अपना कार्य निर्विघ्न कर रहे हैं और पाकिस्तान उन्हें पोषित कर रहा है, जैसे अमेरिकी सेनाने ओसामा बिन लादेनको पाकिस्तानके भीतर घुसकर मृत्युदण्ड दिया था, ऐसा ही भारतद्वारा अब इस आतङ्की राष्ट्रको और इनके पोषित आतड्कियोंको दण्ड देना आवश्यक हो गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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