आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २५.५)


कल हमने प्याजके कुछ लाभोंके विषयमें जाना था, आज हम इससे होनेवाले कुछ अन्य लाभ व प्रयोगमें सावधानियोंके विषयमें जानेंगें –
प्याजके अन्य लाभ –
१. ‘टाइफाइड’ज्वरमें (आंत्र ज्वरमें) नित्य एकसे तीन चम्मच प्याजका रस अत्यधिक लाभ देता है । इससे रोगके विषाणु भी शीघ्र नष्ट होते हैं ।
२. सोते समय लाल प्याजके गोल बडे टुकडेको काटकर पैरोंके तलवोंपर रखकर ऊपरसे जुराबें पहन लें, यह प्रयोग शरीरसे सभी विषाक्त पदार्थोंको बाहर कर देता है ।
३. प्याज नेत्रोंके लिए अति उत्तम औषधि है । नेत्रोंमें डालनेवाली अनेक आयुर्वेदिक औषधियोंमें प्याजके रसका उपयोग होता है ।
४. एक प्याज अनिद्राके रोगकी चिकित्सा कर सकता है । यह निश्चित रूपसे अच्छी नींद देता है ।
५. प्याज पाचन-तन्त्रमें सुधार कर सकता है । यदि आपको कोई पाचन समस्या है, तो प्याज पाचन रसमें वृद्धिकर इसे ठीक कर सकता है ।
६. नाकसे रक्त प्रवाहित हो रहा हो तो कच्चा प्याज काटकर सूंघ लीजिए । इसके अतिरिक्त यदि बवासीरकी समस्या हो तो श्वेत प्याज खाना आरम्भ कर दें ।
७. प्याजके रस और नमकका मिश्रण मसूडोंकी सूजन और दन्त वेदनाको (दर्दको) न्यून करता है ।
८. पातालकोटके आदिवासी मधुमक्खी या ततैयाके काटे जानेपर घावपर प्याजका रस लगाते हैं । किसी अन्य कीटके काटनेपर भी प्याजका रस लगानेसे लाभ मिलता है ।
९. प्याजके बीजोंको सिरकामें पीसकर दाद-खाज और खुजलीमें लगानेपर शीघ्र लाभ मिलता है ।
१०. ‘हिस्टीरिया’का रोगी यदि मूर्च्छित हो जाए तो उसे प्याज कूटकर सुंघाएं, इससे रोगीको शीघ्र चेतना आ जाती है ।
११. इसके अतिरिक्त प्याज कई अन्य सामान्य शारीरिक समस्याओं जैसे – मोतियाबिंद, सिरमें वेदना और सांपके काटनेपर भी प्रयोग किया जाता है । प्याजका पेस्ट लगानेसे फटी एडियोंमें लाभ मिलता है ।
अब हम प्याजके प्रयोगमें सावधानियोंके विषयमें जानेंगें, जिसे ध्यानमें रखकर प्याजका पूर्ण लाभ लिया जा सकता है –
१. प्याज शर्कराके स्तरको अल्प करता है; इसलिए मधुमेहके रोगियोंको इसके सेवनसे पूर्व शर्कराकी जांच करनी चाहिए । यदि कोई अन्य औषधी/औषधि चल रही हो तो प्याजका सेवन चिकित्सीय परामर्शसे ही करें !
२. यद्यपि कई जठरान्त्र सम्बन्धी विकारोंकी चिकित्सामें प्याजका उपयोग किया जाता है, तथापि इसका अधिक मात्रामें उपयोग ‘गैस्ट्रिक जलन’, वमन या मितलीका कारण हो सकता है । यदि प्याजके उपयोगसे नियमित रूपसे ऐसी किसी भी स्थितिका अनुभव करते हैं, तो आप चिकित्सकसे परामर्श करें ।
३. त्वचापर प्याजका रस लगानेपर मुख या त्वचापर जलन और चकत्तेका अनुभव हो सकता है; इसलिए इसे अपनी त्वचापर लगानेसे पूर्व अपनी त्वचाके एक छोटेसे क्षेत्रपर परीक्षण करनेके लिए परामर्श दिया जाता है ।
४. गर्भवती महिलाओंको प्याज सीमित मात्रामें खाना चाहिए; क्योंकि इस समय जलन व खट्टी डकारोंकी समस्या हो सकती है ।
५. प्याजके अनियन्त्रित सेवनके कारण जलन हो सकती है । इसप्रकार, यह हृदय रोगियोंपर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न कर सकता है, ऐसी स्थितिमें त्वरित चिकित्साकी आवश्यकता होती है ।
६. इसकी तीव्र गन्धके कारण प्याजका उपयोग ‘सल्फर’की उच्च सामग्रीके लिए उत्तरदायी हो सकता है ।
७. प्याज ‘सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप’को न्यून कर सकता है । इस प्रकार, जो रक्तचापके लिए औषधियां लेते हैं, उन लोगोंको इसके सेवनके समय सावधानी रखनी चाहिए ।
८. प्याजसे तीवग्राहिता/तीव्रग्राहिता/तीव्र प्रतिक्रिया (एलर्जी) होनेवाले लोगोंको ‘एस्पिरिन’ और प्याज नहीं लेना चाहिए; क्योंकि इससे प्याजकी संवेदनशीलता बढ जाती है ।
९. प्याजका सेवन करते समय किसी भी ‘लिथियम’की औषधि लेनेसे पूर्व चिकित्सकसे परामर्श करना उचित है ।
१०. प्याज न केवल खानेका स्वाद बढाता है, वरन खानेको पोषक तत्त्व भी प्रदान करता है; परन्तु अधिकतर लोगोंको प्याजके अधिक सेवनसे मुखसे दुर्गन्ध आनेकी समस्या होती है ।



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