सबरीमालामें महिलाओंके प्रवेशपर राहुल गांधीका द्विपक्षीय व्यवहार, केवल मतोंकी (वोटकी) राजनीति !!


जनवरी १३, २०१९
   
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीने शनिवार, १२ जनवरीको यह स्वीकार किया कि केरलके सबरीमाला मंदिरमें महिलाओंके प्रवेशपर उन्होंने अपने विचार परिवर्तित कर लिए है । मंदिरमें मासिक धर्मकी आयुवाली महिलाओंके प्रवेशका खुले रूपसे समर्थन कर चुके राहुल गांधीने कहा कि विरोध प्रदर्शन करनेवाले श्रद्धालुओंके तर्क भी अनुचित नहीं हैं ।

‘गल्फ न्यूज’के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्षने दुबईमें एक कार्यक्रमको सम्बोधित करते हुए कहा कि अब उन्हें लगता है कि मंदिरमें महिलाओंको प्रवेश नहीं देनेकी परम्पराके लिए प्रदर्शन करनेवालोंके तर्क भी उचित हैं । मैं दोनों ही तर्कोंकी वैधताको समझता हूं; इसलिए इस प्रकरणमें स्पष्ट बात नहीं कह सकता कि यही होना चाहिए । मैं इसे केरलकी जनतापर छोडता हूं कि वे क्या निर्धारित करते हैं ।”

वहीं ‘इंडियन एक्सप्रेस’के अनुसार राहुल गांधीने सबरीमालापर अपना पक्ष परिवर्तनकी बात स्वीकार की ।
राहुलने कहा, “मैंने दोनों ही तर्क सुने हैं । आरम्भमें इसपर मेरा परामर्श आजसे भिन्न था । केरलकी जनताकी बात सुननेके पश्चात मुझे दोनों ही तर्क उचित दिखते हैं । मुझे यह तर्क भी उचित लगता है कि परम्पराओंको संजोकर रखा जाना चाहिए और यह तर्क भी कि महिलाओंको समान अधिकार मिलने चाहिए ।”

राहुल गांधी और पार्टीके केरलके नेताओंने गत दिवसोंमें महिलाओंके प्रवेशके विरोधमें प्रदर्शन करनेवाले हिंदुत्व समूहोंपर विरोध किया था । गांधीके वक्तव्यको आगामी लोकसभा मतदानके लिए कांग्रेसके ‘सॉफ्ट हिंदुत्व अप्रोच’के रूपमें देखा जा रहा है ।

 

“एक ओर सोनिया गांधीजी संसदमें कांग्रेस नेताओंको सबरीमालाके पक्षमें बोलनेसे मनाकर उनकी काली पट्टियां उतरवा देती हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी कह रहे हैं कि मैं दोनोंपर सहमत हूं । क्या राहुल गांधीजी अपनी माताके विरुद्ध जानेका प्रयास तक कर सकते हैं ? और राहुलजीको बताना चाहेंगें कि नेता अर्थात नेतृत्व शक्तियुक्त व्यक्ति, जो निर्णय ले । किसी भी प्रकरणके दो ही उत्तर हो सकते हैं, या तो हां या ना, हां और ना दोनों नहीं !; अतः सर्वप्रथम विचारकर अपना पक्ष निर्धारण करें, दो नावोंपर चलनेवाला अधिक दूर नहीं जा सकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : न्यूज १८



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