जलीकट्टूको हिंसक बतानेवाले कांग्रेस दलके ही राहुल गांधीने अब उसे बताया ऐतिहासिक संस्कृति
१५ जनवरी, २०११
तमिलनाडुमें जलीकट्टूके कार्यक्रममें राहुल गांधीने भाग लिया । अनेक लोगोंने राहुलकी निन्दा की । उनके ही नेताओंद्वारा उसे बर्बर बतानेपर तथा राहुलद्वारा प्रशंसा करनेपर लोगोंने ‘सोशल मीडिया’पर उसे लताडा ।
२०१६ के मतदानसे पूर्व कांग्रेसने तमिलनाडुके जलीकट्टूको पशुओंपर अत्याचार करनेवाला घोषित किया था । कांग्रेसने अपने घोषणा-पत्रमें उसे प्रतिबन्धित करनेका प्रस्ताव भी रखा था । यह तब हुआ, जब भाजपाद्वारा इसे समर्थन देनेपर, पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंहके शासनने भी इसे हिंसक बताया था और उन्होंने भाजपापर राजनीतिकरणके लिए आरोप भी लगाए थे ।
२०१६ में शशि थरूरने भी भाजपापर आरोप लगाए थे । उसने वहांके पशु कल्याण ‘बोर्ड’से भी आग्रह किया था कि वे उन बैलोंको यातना देनेवाले खेलको समाप्त करें; किन्तु राहुलने अब वहां कार्यक्रममें सम्मिलित होकर यह कहा है कि उसे तमिल संस्कृति और वहांका इतिहास भारतके भविष्यके लिए आवश्यक लगता है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए । उसने जलीकट्टूमें व्यवस्था और सुरक्षाकी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उन लोगोंको सन्देश देने आया है, जो तमिल संस्कृतिको नष्ट करना चाहते हैं ।
देशद्रोही नेता किसी भी संस्कृतिका, कभी भी सम्मान नहीं कर सकते । उन्हें तो केवल मतदाताओंसे मत एकत्रित करने होते हैं, देश चाहे खण्डित हो या वहांके हिन्दुओंका जीवन नष्ट हो, उससे उन्हें क्या लेना-देना ? उन्हें तो केवल शासन चाहिए । देशवासियोंको अब ऐसे अवसरवादी नेताओं व दलोंको बाहरका मार्ग दिखाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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