‘तेरी बेटीने मुसलमान धर्म अपनाकर विवाह कर लिया है, अभियोग नहीं उठाया तो तेरे बेटे को मार देंगे’, राजस्थानमें इतना धमकाया कि पिताने कर ली आत्महत्या


२६ नवम्बर, २०२१
      रामनिवास जाटने २४ नवम्बर २०२१, बुधवारको आत्महत्या कर ली । वे एक ऐसी बेटीके पिता थे, जिसे भगा ले जानेका आरोप यासीन खांके बेटे अनीसपर है । प्रतिवेदनके अनुसार, जब रामनिवासने अपनी अवयस्क बेटीको भगा ले जानेका परिवाद ‘पुलिस’से किया, तो आरोपित पक्ष उन्हें धमकाने लगा और इतना धमकाया कि वे आत्महत्या करनेको विवश हो गए । प्रकरण राजस्थानके हनुमानगढ जनपदका है ।
      आत्महत्याके पश्चात आक्रोशित ग्रामीणोंने रामनिवासका शव रखकर प्रदर्शन किया । ‘पुलिसकर्मियों’को निलम्बित करते हुए आरोपितोंको बन्दी बनाए जानेकी मांग की है । हनुमानगढ ‘पुलिस’का कहना है कि प्रकरण प्रविष्टकर आरोपितोंकी छानबीन की जा रही है ।
      मृतक रामनिवास जाट पचारवाली गांवके रहनेवाले थे । समाचार माध्यमोंके प्रतिवेदनके अनुसार, ७-८ नवम्बरको रामनिवासकी अवयस्क बेटीको अनीस ‘बहला-फुसलाकर’ भगा ले गया । इसका प्रतिवाद ‘पुलिस’से किया गया । ‘पुलिस’पर आरोप है कि उसने युवतीको ढूढनेका कोई प्रयास नहीं किया ।
      आरोप है कि प्रतिवाद प्रविष्ट किए जानेके उपरान्त, रामनिवास जाटको यासीन खां और उसका दूसरा बेटा सोनू, ४-५ अन्य लोगोंके साथ प्रतिवाद ‘वापस’ लेनेके लिए धमकाने लगा । कथित रूपसे रामनिवाससे कहा गया, “तेरी बेटीने मुसलमान धर्म अपनाकर विवाह कर लिया है । अभियोग ‘वापस’ नहीं लिया तो तेरे बेटे पंकजकी हत्या कर देंगे ।” इतना ही नहीं, पीडित परिवारका पीछा किया जाने लगा और डरानेके अनेक प्रयास किए गए ।
      बताया जाता है कि जिस दिवस रामनिवासने आत्महत्याकी उस दिवस भी सवेरे एक वाहनमें ५-७ लोग उनके घर आए थे । उन्होंने तीव्र ध्वनिसे ‘हार्न’ बजाया और भय फैलानेके लिए ‘गली’में कई बार वाहन घुमाया । इस भयसे रामनिवासने पहले अपने परिवारको घरके भीतर बन्द किया, तत्पश्चात विषैला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली । ‘पुलिस’ने इस प्रकरणमें अभियोग प्रविष्टकर जांच आरम्भ कर दी है ।
       देशमें जहां भी कांग्रेसका शासन होता है, वहां धर्मान्ध जिहादी भयमुक्त होकर बहुसंख्यकोंपर अत्याचार करते हैं और कांग्रेसी शासन और प्रशासन कार्यवाहीके नामपर बहुसंख्यकोंका उत्पीडन और जिहादियोंकों सरंक्षण करता है । कांग्रेस नामक रोगसे मुक्त होनेके लिए हिन्दूराष्ट्र बनना कितना आवश्यक है, ऐसी घटनाओंसे सिद्ध होता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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