राजस्थान: वसुन्धरा शासनने ‘मियांका बाडा’ गांवका परिवर्तित कर महेश नगर किया !


अगस्त ९, २०१८

गुरुवारको राजस्थान शासनने औपचारिक रूपसे तीन गांवोंके नाम बदलनेकी घोषणा कर दी ! तीन दिवस पूर्व ही तीनों गांवके नाम बदलनेके प्रस्तावको केन्द्रीय गृह मन्त्रालयसे हरी झण्डी मिली है । अब से बाडमेरके ‘मियोंका बाडा’ गांवको महेश नगर नामसे जाना जाएगा ! जालौर प्रान्तका नरपादा गांव अब ‘नरपुरा’ कहलाएगा, जबकि झुंझुणूमें आने वाला ‘इस्माइलपुर’ अब ‘पिछवां खुर्द’के नाम से जाना जाएगा । कथित रूपसे इस्लामिक सुनाई देने वाले इन गांवोंका नाम बदलनेका प्रारूप भी अब विवादोंके घेरेमें आ गया है । इसे भी उत्तरप्रदेशमें मुगलसराय रेलवे जंक्शनका नाम बदलकर ‘दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन’ करनेके अगले भागके रूपमें देखा जा रहा है ।
राजस्थानकी मुख्यमन्त्री वसुन्धरा राजेके नेतृत्व वाली भाजपा शासनने गृह मन्त्रालयको गांवोंका नाम बदलनेका प्रस्ताव इसी वर्षके आरम्भमें भेजा था । इससे पूर्व सम्बन्धित विभागने गांवका नाम बदलनेको स्वीकृति दे दी थी । यद्यपि शासनने विधानसभा मतदानसे ठीक पूर्व लिए गए इस निर्णयके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है । स्थानीय नागरिक और अधिकारियोंमें इस सम्बन्धमें भिन्न-भिन्न कारणोंपर चर्चा हो रही है । विपक्षने भाजपा शासनपर मतदाताओंके ध्रुवीकरण और दो समुदायोंके मध्य अलगाव पैदा करनेके प्रयासका आरोप लगाया है ।

सूत्रोंके अनुसार, नाम बदलनेका निर्णय इन गांवोंके स्थानीय नागरिकोंकी परिवादके पश्चात लिया गया । गांवके लोगोंने इस्लामिक नाम होनेकी परिवाद की थी । उदाहरणके लिए, ‘मियोंका बाडा’ गांव, २००० की जनसंख्या वाला हिन्दू बहुल गांव है । इस गांवमें केवल चार कुटुम्ब ही मुसलमानोंके हैं । एक अधिकारीने ‘द इण्डियन एक्सप्रेस’को बताया कि स्थानीय लोग इस बातकी परिवाद कर रहे थे कि नामके कारण गांवके लोगोंके पास विवाहके प्रस्ताव नहीं आते थे ! यह भेदभाव आसपासके गांवके लोग भी केवल गांवके नामके कारण किया करते थे ।

यद्यपि बाडमेरके सिवानासे भाजपा विधायक हमीर सिंह भायलने दावा किया कि ‘मियोंका बाडा’ गांवका नाम बदलनेका प्रस्ताव १० वर्ष पुराना है । इसका नाम बदलकर ‘महेश नगर’ इस कारण किया गया है; क्योंकि गांवमें भगवान शिवका प्राचीन मन्दिर है । इससे पूर्व भी इसको महेश नगर ही कहा जाता था; लेकिन देशमें मुगलोंका शासन होनेके पश्चात और लोगोंका विस्थापन हो जानेके कारण इसे ‘मियोंका बाडा’ कहा जाने लगा ।

पूर्व सरपंच हनुमन्त सिंह इस प्रकरणमें दूसरी ही बात बताते हैं । उन्होंने कहा, स्वतन्त्रतातक इस गांवका नाम महेश बाडा था; लेकिन विभाजनके समय इसका नाम बदलकर ‘मियोंका बाडा’ हो गया । अब इसका नाम बदलकर महेश नगर हो गया है । गृह मन्त्रालयने मार्चमें संसदको बताया था कि उनके पास विभिन्न राज्योंसे २७ ऐसे प्रस्ताव आए हैं, जिनमें स्थानका नाम परिवर्तित करनेका प्रस्ताव किया गया है । इन प्रस्तावोंमें कई गांवों, कस्बों और रेलवे स्टेशनोंके भी नाम सम्मिलित हैं ।

स्रोत : जनसत्ता



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