राजस्थानमें आरम्भ होगी ‘काउ सफारी’, पर्यटक बैलगाडीका आनन्द लेंगे


जून २८, २०१८

राजस्थानमें ‘काउ सफारी’ अब पर्यटनका नूतन माध्यम होगी । यहां आने वाले पर्यटक अब कुछ दिन गायोंके साथ रह पाएंगे । दो वर्ष पूर्व समाचार माध्यम ‘आज तक’ने जिस हिंगोनिया गौशालाको गायोंका ‘शमशान’ बननेका प्राकट्य किया था, वहां पर अब ‘काउ सफारी’ बन रहा है । यहांपर लोग बैलगाडीमें बैठकर देशभरकी भिन्न-भिन्न गायोंकी प्रजातियोंको देखेंगे । साथ ही गायोंके साथ उस जंगलमें ‘ट्री हाउस’पर रुक भी सकेंगे ।
जयपुरसे लगभग ३० किमी दूर हिंगोनिया गौशालाकी स्थिति दो वर्ष पूर्व जिसने भी देखी थी, वह अचम्भित रह गया; लेकिन गत दो वर्षोमें हिंगोनिया गौशालाको देखनेके लिए पर्यटक पहुंच रहे हैं । ‘आज तक’पर समाचार दिखाया गया था कि राजस्थानमें किस प्रकारसे हिंगोनियाकी गौशाला गायोंके लिए ‘शमशान’ बनी हुई है, उसके बाद हिंगोनिया गौशालाको शासनने ‘अक्षय पात्र’ नामकी संस्थाको दे दिया । आजकल हिंगोनिया गौशालाके जंगलोंमें ‘काउ सफारी’ बनानेका कार्य द्रुत गतिसे चल रहा है ।

हिंगोनिया गोशालाके इंचार्ज राधा प्रिया दासने बताया कि इसमें देशभरकी देसी गायोंको रखा जाएगा, जहां शपर लोग बैलगाडीसे पूरे जंगलमें घूमेंगे ! प्राकृतिक रूपसे गाय यहांपर चारा खाएंगी और पर्यटक यहां गायोंको चारा खिला पाएंगे । बैलगाडीपर घूमना निशुल्क रखा गया है ।

इसी तरहसे यहांपर वृक्षोंपर रहनेकी व्यवस्थाकी जा रही है, जहां ‘ट्री हाउस’ बनाया जा रहा है । इसमें लोग रातको गायोंके मध्य रुक भी सकेंगे ! जलके लिए जंगलके पुराने प्राकृतिक जलस्रोतोंको पुर्नजीवित किया जा रहा है ।
इसमें थारपारकर, गीर, नागौरी जैसी प्रजातिकी गायें रखी जाएंगी ! लोगोंको इनके बारे में बताया जाएगा ! गीर गाय जिसके मूत्रमें ‘स्वर्ण’ होनेकी बात कही जाती है ।
राजस्थान देशका पहला राज्य है, जहांपर ‘गाय मन्त्रालय’ बनाया गया है और गायोंके लिए अलगसे ‘कर’ लिया जाता है । जन्माष्टमीके समय इस ‘काउ सफारी’को आरम्भ किया जाएगा ।
‘स्काउट सफारी’में लोगोंको गौ सेवाका भी अवसर दिया जाएगा । जो कोई गायको अपनाना चाहता है, वो एक गायको अपनाकर उसकी सेवा भी कर सकता है और उसके लिए पैसे भी दे सकता है ।
यहां आने वाले लोगोंके लिए गौदुग्धसे बने खाद्य पदार्थभी मिलेंगे । अभिवादन क्षेत्रसे (रिसेप्शन एरिया) लेकर जलपानगृहतक हिंगोनिया गौशालाके दूध, लस्सी, छाछ, रबडी, मिठाईयां जैसी खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे । पर्यटनसे सम्बन्धित लोगोंका कहना है कि इससे राजस्थानमें पर्यटन बढेगा ।
हिंगोनिया गोशालाको राजस्थान शासन, जयपुर नगर निगमकेद्वारा पैसे देता है; लेकिन राजस्थान शासन इसे ऐसे प्रारूपके रूप में बनाना चाहती है, जहां से ये स्वयं धन अर्जित करने लगे । अभी यहां दूध, गोबर, आदिका विक्रय आरम्भ हो गया है ।
राजस्थानमें कुल एक कोटि ३३ लाख गोवंश हैं, जिसमें से ६ लाख गोशालाओंमें है, इनमें ३३ लाख दुधारू गाय हैं । हिंगोनियामें लगभग २५ सहस्त्र गाय हैं ।

स्रोत : आजतक



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