सितम्बर २६, २०१८
बीजेपीके राष्ट्रीय महामन्त्री राम माधवने मंगलवारको बिडला सभागारमें दीनदयाल स्मृति व्याख्यानमें सम्बोधनमेें कहा, “पण्डित दीनदयालने राजनीति राष्ट्र और जनताके लिए करना सिखाया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें सत्ता नहीं चाहिए ! हमें सत्ता चाहिए, बार-बार चाहिए और राजस्थान जैसे राज्यमें रीति-रिवाज, परम्परा तोडकर पुनः चाहिए !”
बता दें, इस कार्यक्रमका आयोजन ‘एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान’की ओर से किया गया था, जिसमें माधवने भारतके विभाजन, कश्मीर और महागठबन्धनको लेकर कांग्रेसपर कई प्रहार किए और आरोप लगाए । उन्होंने कहा कि राजनीति पराक्रमकी होनी चाहिए, रक्षात्मक नहीं । कांग्रेसने १९१६ में पराक्रमकी राजनीतिको छोड दिया था, जिसके कारण १९४७ में देशका विभाजन हुआ था । उन्होंने कहा कि राष्ट्रहितमें हम सब छोडनेको सज्ज रहते हैं । पहले राममन्दिरके लिए वी.पी सिंहने सरकार छोडी और अब कश्मीरमें सरकार से बाहर आए ।
माधवने कहा कि आज हम कश्मीरमें पंचायतके मतदान कराने जा रहे हैं । ऐसा वहां प्रथम बार हो रहा है । कश्मीरमें कुछ लोग ऐसे हैं, जो बहक गए हैं, लेकिन वहां भारतके लिए लाखों लोगोंका समर्थन प्राप्त है, इसलिए हमें कश्मीरी लोगोंसे नित्य देशभक्तिका साक्ष्य नहीं मांगना चाहिए ।
“मन्त्रीजी ! यह तो सर्वविदित है कि नेताओंको ‘साम-दाम-दण्ड-भेद’से सत्ता चाहिए, परन्तु सत्तामें आनेके पश्चात क्या करना चाहिए, सम्भवतः भूल गए ! यदि स्मरण रहता तो सत्ता हेतु रीति-रिवाज व परम्परा तोडनेकी आवश्यकता ही कहां होती ! ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
Leave a Reply