सुरक्षाबलों को रमजान के दौरान ऑपरेशन नहीं चलाने का केंद्र का आदेश, 90 मिनट बाद ही आतंकियों का सेना पर हमला


नई दिल्ली.  केंद्र सरकार ने रमजान के दौरान सुरक्षाबलों से जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन नहीं चलाने के लिए कहा है। हालांकि, इसके एक घंटे बाद ही आतंकियों ने शोपियां के जामानगरी में सेना के गश्ती दल पर हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक, इलाके में मुठभेड़ जारी है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि ये फैसला अमन पसंद करने वाले मुस्लिमों को शांतिपूर्ण माहौल मुहैया कराने के लिए है। हालांकि, ट्वीट में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आतंकियों के हमला करने या मासूमों की जान बचाने के लिए सुरक्षाबलों जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इस फैसले की जानकारी गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को दे दी है।
इस्लाम का नाम खराब करने वालों को अलग करना जरूरी
– गृह मंत्रालय ने ट्वीट में लिखा है, “ये जरूरी है कि आतंक और डर फैलाकर इस्लाम का नाम खराब करने वालों को अलग कर दिया जाए। सरकार इस पहल में सभी से सहयोग और मुस्लिम भाइयों-बहनों की मदद की उम्मीद करती है, ताकि वे शांतिपूर्ण और बिना किसी परेशानी के रमजान मना सकें।”

 

महबूबा ने की थी रमजान के दौरान राज्य में युद्ध विराम की मांग
– राज्य में ऑपरेशन रोके जाने के फैसले पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि रमजान शांति का त्योहार है और ऐसे फैसले राज्य में शांति और अमन का माहौल बनाने में मदद करेेंगे।

– गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर में ऑल पार्टी मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र से रमजान और अमरनाथ यात्रा के दौरान राज्य में युद्ध विराम की मांग की थी। हालांकि, इस पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर समेत देशभर में शांति और एकता को खतरा पहुंचाने वाले आतंकवाद का सामना मजबूती से करेगी और इससे निपटने के लिए जो भी कदम उठाने होंगे, सेना वो उठाएगी।

 

एक्सपर्ट व्यू : ऑपरेशन नहीं चलाने के फैसले का तीन तरह से असर हो सकता है
1) मेजर जनरल (रिटायर्ड) एसके राजदान ने कहा, ‘‘इंटरनेशनल डिप्लोमैसी में इसे बड़ा कदम माना जाता है। जब हर कोई कह रहा हो कि कश्मीर में ऑपरेशंस नहीं रुकना चाहिए, तब मोदी सरकार इसके उलट फैसला करती है। इससे इंटरनेशनल कम्युनिटी में अच्छा मैसेज जाता है। शी जिनपिंग ने भी कहा था कि मोदी अनप्रीडिक्टिबल हैं। इस वजह से उन्होंने भी मोदी से हाथ मिलना मुनासिब समझा।’’

 

2) ‘‘इसका राजनीतिक असर ये होगा कि महबूबा मुफ्ती सरकार का मोदी सरकार में भरोसा बढ़ेगा।’’
3) ‘‘हमेशा शिकायत करने वाले कश्मीर के कुछ लोगों के पास अब कहने को कुछ नहीं बचेगा, क्योंकि कश्मीर की आवाम यह देख रही है कि रमजान के महीने में उनकी भावनाओं की इज्जत रखते हुए सरकार ने ऐसा फैसला लिया है। अब यदि आतंकी कुछ हरकत करते हैं तो उन्हें अंजाम भुगतना होगा।’’

 

मई के पहले हफ्ते में मारे गए थे 8 आतंकी
– 5 मई को श्रीनगर में सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया था। 6 मई को शोपियां में 5 आतंकी मारे गए थे।
– मारे गए आतंकियों में से एक मोहम्मद रफी भट कश्मीर यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग में संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर था। वह 4 मई से गायब था। भट गांदेरबल जिले के रहने वाला था।
– 5 मई को ही कश्मीर के बांदीपोरा में शाहगुंड हाजिन के गुलशन मोहल्ला के गुलाम हसन डार (45) उर्फ हस्सा रस्सा और उसके 26 वर्षीय भतीजे बशीर अहमद के घर में आतंकी घुसे और परिवार के लोगों को बंधक बना लिया और दोनों को गोली मार दी गई।



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