कलाके माध्यमसे हिन्दू धर्मके प्रति घृणाका भाव दर्शाता चलचित्र ‘रावण लीला’
१२ सिंतबर, २०२१
‘लैला’, ‘पीके’ एवं ताण्डव जैसे हिन्दू धर्मपर कलङ्क लगाते चलचित्रोंके पश्चात, इसी दिशामें अब नूतन चलचित्र ‘रावण लीला’ आ रहा है । इसमें भगवे वस्त्र पहनकर आगजनी, तोडफोड जैसे कुकृत्य करते हिन्दू दर्शाए गए हैं । इससे पूर्व भी सलीम-जावेदद्वारा शिव मन्दिरमें उपस्थित नास्तिक पात्रको, ईश्वरसे अधिक श्रद्धा ‘७८६’ में रखते हमने देखा है । दयालुताके प्रतीक रहीम चाचा नामक पात्र भी हम देख चुके । अब इस नूतन चलचित्रमें हमारे धर्मको लज्जित करने हेतु राम लीलाके पात्र रावण तथा सीताको निजी जीवनमें एक दूसरोंसे प्रेम करते दर्शाया गया है । एक दृश्य में तो रावणका पात्र पूछता है कि जब श्रीरामने रावणकी बहनको अपमानित किया, तो सीताका अपहरण करनेवाले रावणको दोषी तथा श्रीरामको सर्वश्रेष्ठ क्यों माना जाता है ?
हमारे त्योहारोंपर अपने उपदेश देने हेतु अपने ज्ञानके भण्डार खोलनेवाले वामपन्थी, नास्तिक, धर्मद्रोही इत्यादि इस चलचित्रपर भी कोई सकारात्मक उपदेश ढूंढ ही लेंगे । अब हिन्दुओंको जाग्रत होकर ऐसे सभी चलचित्रोंका बहिष्कार करना चाहिए । ऐसे चलचित्रोंपर शासनकी ओरसे भी प्रतिबन्ध लगना चाहिए, जो हमारी धार्मिक भावनाओंपर आघातकर, हमारे भविष्यमें आनेवाली पीढीको असत्य एवं अनुचित सन्देश देते हैं । हमारे यहां भी धर्मकी रक्षाके लिए ईशनिन्दा जैसे किसी विधानकी अत्यन्त आवश्यकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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