२६ कब्रोंके स्थानवाले भोजनालयके स्वामी हैं कृष्णन कुट्टी, ‘ताजे’ पुष्प चढी कब्रोंके मध्य बैठकर लोग करते हैं भोजन


२४ अप्रैल, २०२१
     लोग कब्रिस्तानमें शवोंको मिट्टी देने अथवा अपने सम्बन्धियोंको श्रद्धाञ्जलि देने जाते हैं; परन्तु अहमदाबादमें कब्रिस्तानमें बने भोजनालयमें स्वल्पाहार या भोजन करने भी जा सकते हैं ।
     प्राचीन अहमदाबादके खमाशा क्षेत्रमें एक भोजनालय है, जो कब्रिस्तानपर बना हुआ है, नाम है, ‘द न्यू लकी रेस्टोरेंट’ । यह एक विशेष स्थान है, जहां गडे शवोंके मध्य बैठकर स्वल्पाहार या भोजन किया जाता है । यह भोजनालय उस स्थानपर बना है, जहां पूर्वमें कब्रिस्तान था । भोजनालयके स्वामी कृष्णन कुट्टीने इसके निर्माणके समय कब्रिस्तानको यथावत रखनेका निर्णय लिया । इसके लिए उन्होंने दबे शवोंके मध्य शेष स्थानमें ही बैठनेकी व्यवस्था कर दी ।
     भारतकी स्वतन्त्रताके पश्चात इस प्राचीन कब्रिस्तानको केएच मोहम्मद और कृष्णन कुट्टी नायरने क्रय किया था । उन्होंने यहां एक नीमके पेडके नीचे एक चायका ‘स्टॉल’ आरम्भ किया । चायके अतिरिक्त वो एक ‘क्रीम बन’ भी विक्रय करते थे, जिसे ‘मस्का बन’के नामसे जाना जाता था ।
     पूर्वमें अहमदाबादके लोग कब्रिस्तानमें भोजन करने या चाय पीनेसे डरते थे; परन्तु जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि यहां स्थित दबे शव १९ वीं सदीके लोगोंके हैं, तब उनके मनसे भय निकलता गया । आजभी नित्य कब्रोंके ऊपर  पुष्पोंको चढाया जाता है । ‘
चित्रकार एमएफ हुसैन इनके नित्यके ग्राहक थे । यह भोजनालय प्रत्येक आयु वर्गके मध्य बराबर प्रसिद्ध है । दूर-दूर से अहमदाबाद आनेवाले लोग भी इस भोजनालयमें आते हैं, यहां बैठकर भोजन करते हैं ।
     मैकालेकी आसुरी शिक्षण पद्धतिके कारण समस्त हिन्दू समाज मूर्खतापूर्ण कार्य करता आ रहा है । उन्हें यह भी ज्ञात नहीं की कब्रिस्तान एक अपवित्र स्थान होता है और वहां अनेक अतृप्त आत्माएं रहती हैं और वहां हिन्दू जाकर भोजन ग्रहण करता है ! इन एम एफ हुसैन जैसे जिहादियोंको अपना आदर्श मानता है, जिन्होंने हिन्दू देवी देवताओंके नग्न चित्र बनाए थे । ऐसे जन्मधारी; परन्तु धर्महीन हिन्दुओंको अब धर्मका पाठ पढाना कठिन है; क्योंकि अहंकारवश ये किसीकी सुनते ही नहीं हैं; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे पूर्व ये ईश्वरीय विधानानुसार दण्डित होंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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