०२ मार्च, २०२१
मुम्बईके उच्च न्यायालयमें आदिवासियोंने याचिका दी है । उनके अनुसार, वरवरा रावकी प्रतिभूतिकी जांच की जाए । वरवरा रावको कोरेगांवके हिंसक प्रकरणमें प्रतिभूति दी गई थी । बालघाटके आदिवासी समितिने वरवरा रावके कारण अपने समुदायको पीडित बताया । उसने अर्बन नक्सल वरवरा रावको माओवादी बताया जो कि चीनियोंका पूर्णतः समर्थन करता है । न्यायमूर्ति शिंदेने उसे प्रतिभूतिपर स्वतन्त्र किया था; इसलिए शिंदेको उनके क्षेत्रमें आकर रहने और उनके अत्याचारोंको देखनेके लिए कहा गया है ।
न्यायमूर्ति शिंदेको अवैध अचल सम्पतिका स्वामी बताया गया है । आदिवासियोंने सर्वोच्च न्यायालयसे न्यायाधीशोंकी एक समिति नियुक्त करनेकी मांग की है, जिसमे शिंदेकी अध्यक्षतावाले प्रकरणोंकी जांच की जाए ।
२०१८ में वरवरा रावको ९ साथियों सहित बन्दी बनाया गया था; किन्तु ‘कोरोना’ महामारीको आधार बनाकर उसने शिंदेकी पीठमें आवेदनकर, प्रतिभूतिका अनुचित लाभ उठानेका प्रयास किया था ।
उच्च न्यायालयद्वारा घोर अपराधियोंको स्वतन्त्र कर देना देशके लिए अति घातक है । देशके शत्रु माओवादियोंको कठोरतम दण्ड देकर अन्त करना ही देशके हित में है ।
अर्बन नक्सली हमारे देशके लिए कर्करोगकी भांति हैं । आजकल अधिकतर अपराधियोंका कारावासमें जाते ही स्वास्थ्य बिगड जाता है । यदि न्यायमूर्ति अर्बन नक्सली वरवरा रावके प्रकरणमें एक चिकित्सीय दल गठन करके जांच करवाते और उसकी चिकित्सीय जांचके आधारपर ही प्रतिभूति देते, तब अधिक पारदर्शी होता । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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