‘अगस्ता वेस्टलैंड’में निदेशालयका दावा, २००४ से २०१६ के मध्य ‘RG’को मिले ५० कोटि !!


अप्रैल ४, २०१९

 

प्रवर्तन निदेशालयने दावा किया है कि संक्षिप्त रूपसे ‘RG’के नाम से जाने जानेवाले व्यक्तिको ‘अगस्ता वेस्टलैंड’के सम्बन्धमें २००४ से २०१६ के मध्य ५० कोटि मिले हैं !!


‘इंडिया टुडे’के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालयने आरोपी सुशेन गुप्ताको बन्दी बनाते हुए एक अचम्भित करनेवाला प्रकरण उजागर किया है । सुशेनको इडीने ‘मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम’के अन्तर्गत २५ मार्चकी देर रात्रिको बन्दी बनाया था ।

‘इडी’के आवेदनमें कहा गया है, “सुशेन गुप्ता जानबूझकर अपनी डायरीमें अनुचित संक्षिप्त विवरण देकर जांचको अनुचित बता रहे हैं, जिसमें ‘RG’का प्रयोग एक एब्रिवेशनके (संक्षिप्त विवरण) रूपमें कई पृष्ठोंके अतिरिक्त ‘पेन ड्राइव डेटा’में भी मिला है । २००४ से २०१६ के मध्य ५० कोटिसे अधिककी राशि ‘RG’द्वारा प्राप्त की गई है, जबकि सुशेन गुप्ताद्वारा ‘RG’का अभिज्ञान रजत गुप्ताके रूपमें की गई, जिसकेद्वारा २००७ से सुशील गुप्ताके साथ नकद लेन-देन स्वीकार किया गया था ।

प्रवर्तन निदेशालयका मानना है कि सुशील गुप्ता जानबूझकर उस व्यक्तिकी वास्तविक पहचान उजागर नहीं कर रहे हैं, जिसे ‘RG’ कहा जाता है । सुशेन गुप्ताने दावा किया है कि उक्त “RG” एक रजत गुप्ता, जो राम हरि राम ज्वैलर्सका निदेशक है ।

यद्यपि रजत गुप्ताने निदेशालयको यह कहते हुए उत्तर दिया कि उन्हें ’RG’के संक्षिप्त नामसे कोई सरोकार नहीं है और इसे केवल सुशेन गुप्ता ही बता सकते हैं ।

इससे पूर्व, निदेशालयने यह उल्लेख किया था कि अभियोगके प्रकरणमें क्रिश्चियन मिशेलसे पूछताछके समय श्रीमती गांधीका भी नाम सामने आया था ।

क्रिश्चियन मिशेलको दुबईसे भारत लाए जानेके पश्चातसे ही ‘अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर भ्रष्टाचार’की जांचमें बडा घटनाक्रम देखनेको मिला है । “इटैलियन लेडी”, “इटैलियन लेडीका पुत्र R”,के नामसे, क्रिश्चियन मिशेल यूरोफाइटरकी पैरवी कर रहे थे और कैसे उसने कॉन्ग्रेसके शासनकालमें पीएमओतक अपनी पहुंच बनाई थी, इससे सम्बन्धित अनेकों प्रकरण उजागर हुए थे

 

“देशका धन आजतक किसप्रकार व्यर्थ किया गया, यह देखकर दुःख होता है और दोषी अभीतक घूम रहे हैं ! जिन्हें कारावासमें होना चाहिए था, वे बाहर है । ‘R, RG, इटैलियन लेडी’, कौन है ? यह तो सम्भवतः सभी जानते हैं; परन्तु जांचमें उजागर होना आवश्यक है; परन्तु जांच होनेमें इतना समय लगना, यह अवय प्रश्नचिह्न निर्माण करता है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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