मार्च २८, २०१९
देहरादूनसे एक ईसाई विद्यालयद्वारा घृणित कृत्यका प्रकरण प्रकाशमें आया है । मिशनरी विद्यालय ‘चिल्ड्रेन्स होम एकेडमी’में वरिष्ठोंद्वारा १२ वर्षीय एक बच्चेकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई । आरोप है कि १२वीं कक्षामें पढनेवाले बच्चेने उक्त बच्चेको बिस्किटका पैकेट चोरी करनेका दोषी बताया और फिर ‘बल्ले व स्टंप्स’से पीट-पीटकर उसके प्राण ले लिए । १२ कक्षाके बच्चोंने बच्चेको पहले तो पीटा और उसे वहीं कक्षामें ही छोडकर निकल गए । चोटिल छात्रको चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई; परन्तु इस घटनाके पश्चात विद्यालय प्रशासनने जिस प्रकारका रवैया अपनाया, उसकी चारो ओर निन्दा हो रही है ।
बिस्किटके पैकेटको लेकर आरम्भ हुआ विवाद इतना हिंसक रूप ले लेगा, किसीने सोचा भी नहीं था । यह प्रकरण ऋषिकेश उपमण्डलके रानीपोखरी स्थित ‘होम अकादमी’ नामक विद्यालयका है । मृत छात्रका नाम वासु यादव था । विद्यालय प्रशासन और जौलीग्रांटके चिकित्सक तकने इसे विषाक्त भोजनका प्रकरण बताया; परन्तु पुलिसको इसपर विश्वास नहीं हो रहा था । रानीपोखरी थानाने भी इसे पहले विषाक्त भोजनका ही प्रकरण माना था । मृत छात्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्थित हापुडका रहनेवाला था । उसके पिता कुष्ठ रोगी हैं ।
अकादमी संचालक स्टीफेन सरकारपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं होना पुलिसकी भूमिकाको भी संदिग्ध बनाता है । समाचार विभागने प्रकरणको दबानेमें पुलिसका सहयोग होनेकी भी बात कही है । १० मार्चको मृतक सहित सभी बच्चे गिरिजाघर गए हुए थे । उसी समय यह घटना हुई । छात्रोंने मृतक बच्चेको ठन्डे जलसे नहलाया और गन्दा पानी बलपूर्वक पिलाया ।
उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोगकी चेयरपर्सन उषा नेगीके हस्तक्षेपके पश्चात स्थानीय प्रशासनने प्रकरणमें कडाई दिखाई और आगेकी कार्यवाही की । देहरादूनकी एसएसपी निवेदिता कुकरेतीने कहा कि बच्चेको चिकित्सालय पहुंचानेमें देरी की गई । उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रशासनने इसमें कई चूक की हैं । विद्यालयके कर्मचारियोंने प्रकरणको छिपानेका प्रत्येक सम्भव प्रयास किया है ।
“स्पष्ट है कि प्रत्यक्ष रूपसे विद्यालय, पुलिस प्रशासन इसके लिए उत्तरदायी है । हिन्दू माता-पिता नेत्र मूंदकर बच्चोंको मिशनरी विद्यालयमें भेजते हैं और स्वयंको आधुनिक दिखानेका तो प्रयास करते ही है, साथ ही बच्चेके भविष्यको नष्ट करते हैं । इस प्रकरणसे उन्हें सीखना चाहिए और बालकोंका भविष्य नष्ट करनेवाले इन विद्यालयोंमें भेजना बन्द करना चाहिए । शासन इसपर जांच बैठाए और देखे कि पुलिसने इसे विषाक्त भोजनका प्रकरण क्यों बताया ? यह संदेहास्पद है और प्रत्येक प्रकरणपर हिन्दू-हिन्दू करनेवाले समाचार माध्यमोंने भी इस प्रकरणको क्यों पूर्ण नहीं बताया ? क्यों नहीं बताया गया कि यह घृणित कृत्य एक विद्यालयका नहीं, वरन एक ईसाई विद्यालयका है ! इससे इन सबकी हिदू विरोधी मानसिकताका बोध होता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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