जुलाई २१, २०१८
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस फ्रांसीसी युद्धक विमान ‘राफेल’को शासनपर आक्रमणका बडा मारक बनाने वाले थे, उससे खुद ही चोटिल हो गए । उन्होंने संसदमें ‘राफेल’के क्रयमें कोई गोपनीयता उपनियम न होनेकी बात कही थी । दो घण्टेके अन्दर ही स्वयं फ्रांसने स्पष्ट कर दिया कि राहुल मिथ्याभाषण कर रहे हैं।
स्पष्ट है कि अपने सबसे बडे मुद्देपर ही घेरेमें खडे हुए राहुलके लिए अब विश्वसनीयताका संकट खडा हो सकता है । शुक्रवारको राहुलने फ्रांसीसी राष्ट्रपतिसे भेंटका वर्णन करते हुए कहा था कि उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रयमे कोई गोपनीयताका उपनियम नहीं था । उन्होंने तो एक पग आगे बढते हुए कहा- राष्ट्रपतिने कहा कि पूरे देशको अनुबन्धका सत्य बता दो ।
संसदमें ही रक्षामन्त्री निर्मला सीतारमणने २००८ के तत्कालीन रक्षामन्त्री एके एण्टनीका हस्ताक्षर वाला लिखितपत्र दिखाकर स्पष्ट कर दिया था कि दोनों देशोंके मध्य गोपनीयताका उपनियम है; लेकिन सबसे बडा साक्ष्य फ्रांससे ही आया । फ्रांस विदेश मन्त्रालयने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘राफेल’ विक्रयको लेकर भारतके साथ जो सन्धिकी है उसमें एक गोपनीय नियम भी है जिसका प्रकटीकरण करनेसे दोनो देशोंके रक्षा उपकरणसे सम्बन्धित संचालन क्षमतापर प्रभाव पड सकता है ।
स्पष्ट है कि राहुल अनुचित सिद्ध हुए । उन्होंने सदनमें मिथ्याभाषण किया । देर शामतक फ्रांस विदेश मन्त्रालयकी ओरसे एक वक्तव्य आया, जिसमें कहा गया है कि हमने राहुल गांधीकी ओरसे भारतीय संसदमें दिए गए वक्तव्यको देखा है ।
भारत व फ्रांस वर्ष २००८ में किए गए सुरक्षा समझौतेके अन्तर्गत कुछ ऐसी सूचनाएं, जो एक-दूसरेसे मिली हैं, को गोपनीय रखनेको वैधानिक रूपसे बाध्य है । यह बाध्यता २३ सितम्बर, २०१६ में ३६ ‘राफेल विमान’ व शस्त्रास्त्र क्रय सम्बन्धी सन्धिपर भी लागू होता है । फ्रांसके विदेश मन्त्रालयके प्रवक्ताने राष्ट्रपति मैक्रांकी ओरसे भारतके एक प्रमुख समाचार पत्रको दिए गए साक्षात्कारका भी उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सन्धि संवेदनशील होती है तो हम उसकी सारी जानकारीका प्रकटीकरण नहीं करते ।
वहीं, फ्रांस शासनके वक्तव्यपर राहुल गांधीने कहा कि वे अपने वक्तव्यपर बने हुए हैं । उन्होंने कहा- यदि वे (फ्रांस) मना करना चाहते हैं तो उन्हें करने दो । फ्रांसके राष्ट्रपतिने मेरे सामने यह बात कही थी, उस समय मेरे साथ आनन्द शर्मा और पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह भी थे ।
स्रोत : पंजाब केसरी
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