लद्दाखसे ओझल (गायब) हो गए ७७०० रोहिंग्या मुसलमान, संकटकी आशंका !


नवम्बर २२, २०१८

लद्दाखमें पहुंचे ७७०० रोहिंग्या मुसलमान ओझल (गायब) हो गए हैं ! लेह पुलिस और करगिल पुलिसका दावा है कि यहां कोई भी रोहिंग्या नहीं है ! लद्दाख क्षेत्रके शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रोंके काउंसलर भी कुछ ऐसा ही उत्तर देते हैं कि अब यहां रोहिंग्या दिखाई नहीं पडते । इनका कहना है कि वर्क परमिट या कोई दूसरा सरकारी पत्र बनवानेके लिए भी कोई उनके पास नहीं आया है । दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर सरकार अधिकारिक रूपसे यह कह चुकी है कि लद्दाखमें ७ सहस्त्रसे अधिक रोहिंग्या मुसलमान हैं !

इतना ही नहीं, केंद्र सरकारने भी माना था कि लद्दाखमें पहुंचे लगभग ७७०० रोहिंग्या देशकी सुरक्षाके लिए बडा संकट है । कुछ ही दिवस पूर्व गुप्तचर विभागकी एक सूचना थी कि ५५ रोहिंग्या लद्दाख पहुंच गए हैं । इस बातको भी करगिल और लेह प्रशासन नकार रहा है । ऐसेमें यह प्रश्न उठना सामान्य है कि अन्ततः इतनी बडी संख्यामें लद्दाख पहुंचे रोहिंग्या कहां गए ? क्या उन्होंने कोई दूसरा स्थान खोज लिया है या वे अपनी पहचान छिपाकर लद्दाखमें ही कहींपर रह रहे हैं !

बता दें कि वर्ष २०१२ में यूएन हाई कमीशन फॉर रिफ्यूजीने (यूएनएचसीआर) अधिकारिक रूपसे भारतमें १४ सहस्त्र रोहिंग्या मुसलमानोंको शरण दिलानेकी बात कही थी । गत वर्ष ऐसे समाचार आए थे कि देशमें रोहिंग्याकी संख्या बढकर ४० सहस्त्रके पार पहुंच गई है । जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, केरल, दिल्ली, मेवात-हरियाणा, कोलकाता, यूपी और उत्तर पूर्वके कुछ राज्योंमें इनकी उपस्थिति पाई गई है ।

जम्मू-कश्मीर सरकारने भी कहा था कि ५७०० रोहिंग्या जम्मू और ७६६४ रोहिंग्या लद्दाखमें हैं । यद्यपि शासनने ऐसा कुछ नहीं कहा था, परन्तु गुप्तचर विभागकी मानें तो सबसे अधि रोहिंग्या कश्मीरमें ही बसे हैं । वहींसे ये लोग लद्दाखके करगिल और लेह तक पहुंचे थे । केन्द्रीय गृह मंत्रालयको भी इस बातकी पूरी जानकारी है कि पाकिस्तान सरलतासे कश्मीरमें रह रहे रोहिंग्याके निकट आ सकता है । इसीके चलते जम्मू-कश्मीर पुलिस और दूसरे विभागोंको, जिनमें सैन्य एवं अर्धसैनिक बल सम्मिलित हैं, चेताया गया था ।


करगिलके एसएसपी डॉ. विनोद कुमारका कहना है कि अगस्तसे लेकर अब तक उनके पास रोहिंग्याको लेकर केंद्रकी ओरसे कोई भी सूचना नहीं आई है । इस क्षेत्रके सभी थाने-चौकियोंको चेताया गया है । यहां तक बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) और सेनाको भी सचेत किया गया है कि वे किसी भी व्यक्तिको कार्यपर रखनेसे पूर्व जिला प्रशासनको उसकी सूचना दें ।

दिक्सितके काउंसलर सेरिंग आंगचुकका कहना है कि रोहिंग्या इस क्षेत्रमें नहीं हैं । हम समाचार-पत्रमें पढते रहते हैं कि यहांपर रोहिंग्या हैं, परन्तु कोई भी बाहरी व्यक्ति हमारे हस्ताक्षर कराने या कोई दूसरा पत्र सत्यापित कराने के लिए नहीं आया है ।

कोरजोक क्षेत्रके काउंसलर गुरमेत दोरजेका कहना है कि पहले कुछ लोग हमसे हस्ताक्षर कराने आए थे, परन्तु हमने मना कर दिया था । अब यदि ऐसा कोई प्रकरण सामने आता है तो हम उसे नम्बरदार साहबके पास ले जाते हैं या पुलिसको सूचित कर देते हैं । अपर लेहके काउंसल गे लोबजेंग नयांतक कहते हैं कि नगरमें पहले ऐसी बातें सुननेको मिल रही थी, परन्तु अभी रोहिंग्याको लेकर यहां कोई सूचना नहीं है । यदि कोई यह कहता है कि लद्दाखमें सात सहस्त्र रोहिंग्या हैं तो वह अनुचित है !

गुप्तचर विभाग मानता है कि लद्दाखमें रोहिंग्या हैं और उनके चलते देशकी सुरक्षाको संकट पैदा हो सकता है । कश्मीरमें पहले भी ऐसी सूचनाएं मिलती रही हैं कि पाक विभाग रोहिंग्या मुसलमानोंके साथ निकटता बढा रही हैं । आतंकी छोटा बुर्नी जो कि एक मुठभेडमें मारा गया था, वह रोहिंग्या बताया गया है । उसकी हाफिज सईदके साथ सीधी बातचीत रही है ।

अका मुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्म्द जैसे आतंकी संगठन भी भारतमें बस रहे रोहिंग्यापर कडी दृष्टि रख रहे हैं । उनका प्रयास है कि इन्हें जैसे तैसे बहला-फुसला कर आतंकी गतिविधियोंमें धकेल दिया जाए । जांच विभागका कहना है कि रोहिंग्या पाकिस्तानकी ओर झुक रहे हैं । कश्मीरके अतिरिक्त लद्दाखमें भी पाक गुप्तचर विभाग सक्रिया हैं ।

अभी हाल हीमें तेलंगानाके बालापुर और कंचनबाग क्षेत्रमें रोहिंग्याके आधार कार्डको लेकर ४४ एफआईआर प्रविष्ट हुई हैं । वहां पर रोहिंग्या मुसलमानोंके पैन कार्ड और वोटर आईडी बनवानेके खेलका भी प्रकटीकरण हुआ है । जांच विभागके अनुसार, लद्दाखमें ऐसा ही खेल आरम्भ हो सकता है ।

 

“गुप्तचर विभाग व अन्य केन्द्रीय विभागोंके मध्य सामञ्जस्य नहीं है, यह प्रकरण यही सिद्ध करता है ! रोहिंग्या इस राष्ट्रके लिए बडा संकट है, यह ज्ञात होते हुए भी कठोर निर्णय क्यों नहीं लिए गए ? कोई दुर्घटना होनेपर इसका उत्तरदायी कौन होगा ? यह सब प्रश्न सभी राष्ट्रनिष्ठोंके मनमें है; अतः केन्द्र इसपर कठोरसे कठोर और शीघ्रतासे कार्यवाही करें, यही राष्ट्र हितमें है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ


स्रोत : अमर उजाला



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