धर्मद्रोही ईसाई शासन व पुलिसने महिलाओंको सबरीमालामें छलसे प्रवेश कराया !


जनवरी २, २०१८

सबरीमालाके अयप्पा मंदिरमें बुधवार, २ जनवरी प्रातः दो महिलाओंके प्रवेश करनेके पश्चात क्षेत्रीय दलोंने केरलके माकपा नेतृत्व वाले एलडीएफ शासन और मुख्यमन्त्री पिनराई विजयनका विरोध किया । विपक्षके नेता रमेश चेन्निथलाने कहा कि मंदिरमें महिलाओंके प्रवेशने श्रद्धालुओंकी भावनाओंको आहत किया और यह प्रतिबन्धित आयुवर्गकी महिलाओंको मन्दिरमें प्रवेश करानेके मुख्यमन्त्रीके कडे रवैयेको दर्शाता है ।


कांग्रेस नेता चेन्निथलाने पत्रकारोंसे कहा, “‘वीमेन वॉल अभियान’के पश्चात उन्हें कौन मन्दिर लेकर गया ? २४ दिसम्बरको प्रथम बार मन्दिरमें प्रवेश करनेके असफल प्रयासके पश्चातसे वे कई दिनोंसे भागी हुई थींक्ष। यह स्पष्ट है कि वे पुलिस संरक्षणमें थी । पुलिसने मुख्यमन्त्रीके निर्देशानुसार कार्य किया । यह मुख्यमन्त्रीके अडियल रवैयाका परिणाम है ।’
   
उन्होंने यह भी कहा कि शुद्धिकरणके लिए मंदिरका बंद किया जाना शत प्रतिशत उचित है । ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’के नेताने कहा कि वह राज्यभरमें इसके विरुद्ध प्रदर्शन करेंगें ।’ भाजपाके राज्य प्रमुख पी.एस. श्रीधरन पिल्लईने कहा कि केरल शासनको भगवान अयप्पाके क्रोधका सामना करना पडेगा ।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य शासनने श्रद्धालुओंकी भावनाओंको ठगा है । वहीं भाजपा नेता एम.टी. रमेशने कहा कि दल अगले दो दिवस तक श्रद्धालुओंद्वारा राज्यमें किए जाने वाले ‘नाम जपम प्रदर्शन’का समर्थन करेगी ।

राज्य शासनके सबरीमालामें सभी आयुकी महिलाओंको अनुमति देनेके शीर्ष न्यायालयके आदेशको पारित करनेके निर्णयके विरुद्ध ‘नाम जपम’ आंदोलनकी अध्यक्षता करने वाली ‘सबरीमाला कर्म समिति’ने मुख्यमन्त्रीके त्यागपत्रकी मांग की है ।

मन्दिरमें प्रवेश करने वाली दोनों महिलाओंका अभिज्ञान कनकदुर्गा (४४) और बिंदूके (४२) रूपमें किया गया है । उन्होंने बुधवारको प्रातः तीन बजकर ३८ मिनटपर पारम्परिक काली पोशाक पहने भगवान अयप्पाके पवित्र मन्दिरमें प्रवेश किया था । उन्होंने अपने सिर ढका हुआ था ।

मंगलवारको महिलाओंके ‘वीमेन वॉल अभियानके अन्तर्गत देशके उत्तरी भाग कासरगोडसे दक्षिणी भाग तक लगभग ६२० किलोमीटर लम्बी एक श्रृंखला बनानेके एक दिवस पश्चात महिलाएं आज यहां दर्शनके लिए पहुंची ।

 

“केरलका धर्मद्रोही ईसाई शासन व तथाकथित समाजसेविकाओंने भारतकी सबसे बडी यात्रा सबरीमाला देवस्थानका नियम भंग किया है ! निधर्मी पुलिस, गिरिजाघरों व ईसाई मुख्यमन्त्रीने छलसे प्रतिबन्धित महिलाओंका प्रवेश कराया है ! निधर्मियोंसे वृत्तिके मनुष्योंसे धर्मपालन व धर्मकी आशा रखना तो व्यर्थ ही है, परन्तु निधर्मी लोग स्मरण रखें कि उन्हें इस महापापका भागी बनना ही पडेगा व इसका दण्ड भी भोगना पडेगा ! सभी हिन्दू प्रेमी इसका मुखर होकर विरोध करें, क्योंकि यह हिन्दू धर्मके प्राणोंपर आघात समान है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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