नवम्बर ७, २०१८
सोमवार, ५ नवम्बर शामको २४ घंटेसे अधिक समयके लिए सबरीमाला मंदिरके द्वार खोले गए थे । बहुतसे हिन्दू संगठनोंके विरोध प्रदर्शनको देखते हुए पर्याप्त मात्रामें पुलिसबलोंकी तैनाती की गई थी । इसी मध्य देवालयकी परम्परा और रीतिको बचानेके मध्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके (आरएसएस) एक नेता और ‘त्रावणकोर देवासम बोर्ड’के अधिकारीद्वारा परम्पराका उल्लंघन करनेसे विवाद उत्पन्न हो गया है । दोनोंने पारम्परिक इरूमुदिकेत्तुके (पूजा और अन्य सामग्री) बिना ही देवालयकी पवित्र १८ सीढियां चढीं, जोकि परम्पराके विरुद्ध है !
आरएसएसके प्रदेश नेता वल्सान थिल्लानकेरीको इरूमुदिकेत्तुके बिना गर्भगृहकी ओर जाने वाली १८ सीढियोंपर चढते हुए देखा गया । इसपर थिल्लानकेरीका कहना है कि उन्होंने किसी परम्पराका उल्लंघन नहीं किया है । इसके अतिरिक्त उन्होंने दावा किया कि वह पूजा सामग्री लेकर सीढियोंपर चढे थे । मंदिर दर्शनके लिए भक्तोंको इरूमुदिकेतु लेकर ही सीढियोंपर चढना होता है । इसके पश्चात् उन्हें तेजीसे सीढियां चढनी पडती हैं ।
आरएसएस नेताके कुछ समय पश्चात् त्रावणकोर बोर्डके सदस्य पी शंकरदास भी इरूमुदिकेतुके बिना पवित्र सीढियोंपर चढ गए ! जब इसपर सबरीमाला मंदिरके तन्त्री कण्डारारू राजीवारूसे पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तन्त्री और पण्डालम शाही परिवारके पूर्ववर्ती सदस्य ही बिना पूजा सामग्रीके सीढियोंपर चढ सकते हैं । उन्होंने कहा कि परम्पराके हुए उल्लंघनके कारण विशेष शुद्धीकरण कराया गया है ।
घटनाके पश्चात् मंगलवार, ६ नवम्बरको थिल्लानकेरीने एक समाचार माध्यमसे कहा कि वह और उनके समर्थकोंने निसन्देह मंदिरकी पवित्र परम्परा तोडी है और इसकी क्षतिपूर्तिके लिए उन्होंने शुद्धिकरण भी करवाया । अपनी बातको स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “नेता होनेके कारण हमारे ऊपर यह उत्तरदायित्व है कि हम किसी भी प्रकारकी अवांछित घटनासे बचें । इसी कारण मैंने पवित्र सीढियोंपर चढकर भक्तोंको सम्बोधित किया । यह पुलिसकी एक सहायता थी ।”
“यदि चूक हुई है तो उसे प्रथम बारमें ही स्वीकार करने वाला ही योग्य नेतृत्व शक्तिका धनी हो सकता है और हिन्दूवादी संगठनोंके नेताओंसे हिन्दुओंको नेतृत्वकी ही अपेक्षा है, अहंकार अथवा राजनीतिकी नहीं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत :अमर उजाला
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