साधकोंकी अनुभूतियां


गोड्डा, झारखंडके कुछ साधकोंकी अनुभूतियां

दिनांक ०५.०९.२०१० के दिन जब हम काली मन्दिरमें थे तो मेरे सिरमें वेदना हो रही थी । तत्पश्चात पूज्या तनुजा मां आईं तो मैं खडी हो गई और मेरे सिरकी वेदना तुरन्त समाप्त हो गई ।

– संध्या कुमारी, कक्षा छह

दिनांक ०४.०४.२०१० के दिन जब हम विष्णुधाम जहां पूज्या तनुजा मां निवास करती थीं, वहां जा रहे थे तो मेरे सिरमें वेदना होने लगी । वहां पहुंचनेपर पूज्या मां मुझे जो ‘टॉफी’ खानेके लिए दी, उसे प्रसादके रूपमें ग्रहण किया तो मेरे सिरकी वेदना समाप्त हो गई । तत्पश्चात जब मैं ये अनुभूति पूज्या तनुजा मांको बताने जा रही थी तो पुनः मेरे सिरमें वेदना होने लगी, मैंने पुनः भगवानजीसे प्रार्थना की और मेरी वेदना समाप्त हो गई । तब मैं अपनी यह अनुभूति उन्हें बता पाई ।

– सपना कुमारी, स्नातक प्रथम वर्ष

दिनांक ०४.०८.२०१० के दिन मैं ‘ट्यूशन’में गृहकार्यमें दिए गए पाठको स्मरण करके नहीं गई थी तो शिक्षक बोले कि पाठ स्मरण करो; परन्तु मुझसे वह स्मरण हो ही नहीं रहा था । तब मैंने सरस्वती मांसे प्रार्थना की और मुझे पाठ तुरन्त स्मरण हो गया ।

– मनीषा कुमारी, कक्षा पांच

दिनांक २७.०७.२०१० के दिन जब मैंने जैसे ही पूज्या तनुजा मांके चरण स्पर्श किए तो मेरे पूरे शरीरमें शीतलताका भान होने लगा ।

– मनीषा कुमारी, कक्षा पांच

दिनांक २३.०४.२०१० के दिन जब मेरी मां पटना चिकित्सकके पास गई थी तो मेरा घरके किसी भी कार्यमें मन ही नहीं लग रहा था और मन अशान्तसा लग रहा था; परन्तु जब २४.०४.२०१० को पूज्या तनुजा मांको देखा तो मन शान्त लगने लगा । उनके मेरे घरके पाससे ‘स्कूटी’से जाते समय उस वाहनकी ध्वनि सुनकर भी संतुष्टि लगने लगी और मेरे अन्दर धैर्य और साहस भी आ गया । मैंने अपनी मांको दूरभाष करके कहा, “सब ठीक हो जाएगा, आप चिन्तित न रहें !”

– भारती कुमारी, गोड्डा (झारखंड)

दिनांक ०१.०७.२०१० के दिन जब काली मन्दिरमें पूज्या तनुजा मां श्रीमद्भगवद्गीता पढा रही थी तो ऐसा लग रहा था कि वहां वे नहीं; अपितु गणेशजी बैठकर हमें श्रीमद्भगवद्गीता पढा रहे हैं ।

– मनीषा कुमारी, कक्षा पांच

दिनांक १३.०७.२०१० के दिन जब हम गुरुपूर्णिमाकी सिद्धता (तैयारी) हेतु गोड्डामें स्थित अग्रसेन भवनकी वास्तुशुद्धि कर रहे थे । मैंने कभी अग्रसेनभवन देखा नहीं था; परन्तु दो दिन पूर्व मेरे मनमें जो अग्रसेन भवनका मानचित्र आया, वह ठीक उसी प्रकारका था ।

– कैलाश कुमार मण्डल, कक्षा नौवीं, गोड्डा



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