अनेक साधक कहते हैं कि साधना करनेसे मेरे कष्ट बढ गए हैं; परन्तु ऐसा नहीं होता है । नामजप करनेसे, सेवा करनेसे, त्याग करनेसे असीम आनन्दकी प्राप्ति होती है; परन्तु यदि हमारे व्यावहारिक और आध्यात्मिक जीवनमें अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट हो या पितृ दोष हो तो योग्य साधना करनेपर हमें साधनाके आरम्भिक कालमें कष्ट होते हैं । यदि आपके जीवनमें कष्ट है और वह आध्यात्मिक स्वरूपका है तथा साधना करनेपर यदि कष्ट बढ जाए तो समझ लें कि आप योग्य दिशामें हैं, ऐसेमें दृढ होकर अपनी साधनामें निरन्तरता बनाए रखें और अधिक तडप एवं भक्तिके साथ साधना करें ! कुछ ही समयमें आपके ही नहीं आपके कुटुम्बके सदस्योंके कष्ट भी अल्प हो जाएंगे और आपको आनन्दकी अनुभूति होने लगेगी । – तनुजा ठाकुर (१५.५.२०१४ )
Leave a Reply