सितम्बर १५, २०१८
जयपुर स्थित ‘सप्त शक्ति कमाण्ड’के सैन्याधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल चेरीश मैथसनने शनिवारको जयपुरमें प्रसार माध्यमोंको बताया कि इजरायलके हाइफा नगरकी स्वतन्त्रताके लिए जो भारतीय वीरोंने अपने अदम्य साहसका परिचय देते हुए हाइफा नगरको मुक्त कराया था । ये सभी गाथाएं इजरायल देशके विद्यालयोंमें तो बच्चोंको पढाई जा रही है; लेकिन अपने ही देश भारतमें अभी भी शिक्षामें इस अदम्य साहसके प्रकरणको सम्मिलित नहीं किया गया है; लेकिन शीघ्र वो शासनको इस सम्बन्धमें प्रस्ताव भेजनेके प्रयास करेंगे ।
बता दें कि हाइफाके युद्धमें घुडसवार सेनाका नेतृत्व राजस्थानके मेजर ठाकुर दलपत सिंहने किया था, जो पालीके रहने वाले थे, उनका साथ उप सेनापति कैप्टन अमन सिंहने निभाया, हाइफाके युद्धके स्मृति चिह्न जयपुरमें स्थित ‘६१ कैवलरी रेजिमेंट’से जुडे हैं, जो कि विश्वकी एकमात्र ‘कैवलरी रेजिमेंट’ है ।
इजराइलके नगर हाइफाकी स्वतन्त्रतामें भारत और राजस्थानका विशेष योगदान रहा है । प्रथम विश्व युद्धके समय इजराइलके नगर हाइफापर तुर्कीने अधिकार कर लिया था । उसमें २३ सितम्बर १९१८ को भारत से जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसरकी घुडसवार सेनाने हाइफाको स्वतन्त्र करवाया था । तब से लेकर अब तक इजराइल भारतीय सेनाके शौर्यके लिए हाइफाकी स्वतन्त्रताका दिवस मनाता है ।
बता दें कि जयपुर से ‘६१ कैवलरी रेजिमेंट’का एक दल इजरायल रवाना हुआ है । यह दल हाइफाके मेमोरियल और अन्य स्थानोंपर जाएगा । साथ ही वह हाइफाके मेयरके साथ भी भेंट करेंगे । वहीं जयपुरमें २१ व २२ सितम्बरको कार्यक्रम आयोजित होगा । हाइफाके युद्धमें घुडसवार सेनाका नेतृत्व राजस्थानके मेजर ठाकुर दलपत सिंहने किया था, जो पालीके रहने वाले थे । उनका साथ उप सेनापति कैप्टन अमन सिंहने निभाया, जो दिगराना से हैं । मुख्य रूप से सेनाका दल राजस्थान से ही था ।
दलपत सिंह जोधपुर लांसरके कर्नल हरि सिंहके इकलौते पुत्र थे । वह २२ वर्षकी आयुमें युद्धके समय हुतात्मा हुए थे । उनको अंग्रेजी शासनने ‘मिलिट्री क्रॉस’से पुरस्कृत किया था, जो कि सर्वोच्च पदकके रूपमें जाना जाता है । हाइफाके माउण्ट कारमलमें इन सभी शूरवीरोंका स्मारक स्थित है । जहां इजराइली अपना आभार प्रकट करते हैं । जुलाई २०१७ में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने इसी स्मारकपर श्रद्धाञ्जलि दी थी ।
“इजराइल हमारे वीरोंका गान कर रहा है और हमारा तथाकथित मानवाधिकार आयोग (जिनका कोई काम नहीं है) वीरोंको दुतकारता है ! आने वाली पीढियोंको पाठ्यक्रममें वीर प्रताप, राणा सांगा, शिवाजी महाराज सदृश वीरोंको छोड, आक्रान्ताओं व धर्मान्धोंकी महानताका पाठ पढाया जाता है !! हम किस ओर जा रहे हैं, तनिक स्वयं सोचे !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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