सनातन धर्मके विवाह सम्बन्धी नियम प्रगत अध्यात्मशास्त्रपर आधारित


सनातन धर्मके विवाह सम्बन्धी नियम प्रगत अध्यात्मशास्त्रपर आधारित एवं अहिन्दु वैवाहिक पद्धतियां दोषपूर्ण हैं, यह आधुनिक वैज्ञानिक शोधद्वारा प्रमाणित !
सनातन धर्ममें सगोत्र विवाह एवं निकट सम्बन्धीमें विवाहको मान्यता प्राप्त नहीं थी, लीजिए अब वैज्ञानिक इस बातकी पुष्टि कर रहे हैं कि जिनके यहां निकट सम्बन्धीमें विवाह होता है, उनके बच्चोंमें जन्मदोष होता है ! ऐसा वृत छपा है कि –
पाकिस्तानी इस्लामिक समुदायमें रक्त सम्बन्धियोंके मध्य होनेवाली विवाहसे हुए एक तिहाई बच्चोंमें कोई ना कोई जन्मादोष अवश्य होता है ! एक अध्ययनसे यह सत्य सामने आया है ।
‘डेली मेल’नामक वृतपत्रके अनुसार एशियाई समुदायपर की गई पहली शोधसे ज्ञात हुआ है कि जो चचेरे भाई-बहन आपसमें विवाह करते हैं, उनके बच्चोंमें जन्मदोषका सम्भावना दोगुणा रहती है ।
‘ब्रैडफोर्ड’ शोधके अनुसार चचेरे भाई-बहनोंके विवाहसे होने वाले सौमें से छह बच्चोंमें जन्मदोष पाया गया, जबकि इसके विपरीत जिन माता-पिताने रक्त सम्बन्धियोंमें विवाह नहीं किया था, उनके सौमें से तीन बच्चोंमें ही जन्मदोष देखा गया है ।
इस शोधमें ब्रिटेनके ब्रैडफोर्ड शहरमें वर्ष २००७ से वर्ष २०११ के मध्य जन्म लिए हुए ११३०० बच्चोंको सहभागी किया गया । अत्यधिक लम्बे समय तक इन बच्चोंके स्वास्थ्यपर अध्ययन किया गया । इन बच्चोंमें ४५ प्रतिशत पाकिस्तानी मूल और ४० प्रतिशत श्वेत ब्रिटिश बच्चे थे । (४.११.२०१६)



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