क्यों सीखें संस्कृत ? (भाग – ७)


संस्कृत शब्दके अर्थमें ही परिपूर्णता होना
संस्कृत शब्द (संस्कृतं) ‘सम्यक कृतं इति संस्कृतं’से बना है । इसका शाब्दिक अर्थ है, संस्कारित, परिपूर्ण ! भाषाकी मूल बिन्दु इतने सुपरिभाषित हैं कि संस्कृतको सर्वदा सुस्पष्ट भाषा घोषित किया गया है । ऐसी सुसंस्कृत एवं परिपूर्ण भाषासे स्वयं एवं अपनी अगली पीढीको दूर रखना क्या अधर्म नहीं है ?

कैसे सीखें संस्कृत ?
विद्यालयीन पाठ्यक्रमोंमें बारहवीं तकके पुस्तकोंका प्रथम अभ्यास करें, तत्पश्चात ‘लघुसिद्धान्तकौमुदी’ जैसे ग्रन्थोंका अभ्यास आरम्भ करें ! किसी भी भाषाका प्राण उसका व्याकरण होता है और संस्कृतका व्याकरण एक दर्शन है, आप जितना सूक्ष्मतासे इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही आपको आनन्द प्रदान करेगा । मात्र प्रतिदिन एक घण्टा इसके अभ्यास हेतु निकालनेकी आवश्यकता है । साथ ही ‘यूट्यूब’की भी सहायता ले सकते हैं; किन्तु सदैव संस्कृत सीखने हेतु प्रथम व्याकरणसे उसका अभ्यास आरम्भ करें !



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