सन्त वाणी


जिसप्रकार एक टूटा हुआ ध्वनि-विस्तारक यन्त्र (माइक्रोफोन) सन्देश प्रसारित नहीं कर सकता है, उसीप्रकार एक उद्विग्न मन ईश्वरकी प्रार्थना नहीं कर सकता है ! – परमहंस योगानन्द 



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