सन्त वाणी


जिसप्रकार अन्न, लवणके (नमकके) बिना स्वादरहित और फीका लगता है, ठीक उसीप्रकार वाचालकी कही हुई बातें निस्सार होती हैं और लोगोंको रुचिकर नहीं लगतीं ! – सन्त तुकाराम



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