सन्त वाणी


नेत्रसे अच्छी प्रकार देख-भालकर पांव धरे, वस्त्रसे छान कर जल पिए, शास्त्रसम्मत बात कहें और मनको सदैव पवित्र रखें । आप सदैव सज्जनतासे परिपूर्ण रहेंगे | – आचार्य चाणक्य


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