सन्त वाणी


शुद्ध रूपमें धारण की गई एकमात्र वाणी ही मनुष्यकी शोभा बढाती है, शेष सब आभूषण सदैव नष्ट होते रहते हैं, केवल वाणी रूपी आभूषण ही सच्चा आभूषण है – भर्तृहरि जी महाराज



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution