सन्त वाणी


फल, मनुष्यके कर्मके अधीन है, बुद्धि, कर्मके अनुसार आगे बढनेवाली है तथापि विद्वान् और महात्मा लोग भली-भांतिसे विचारकर ही कोई कर्म करते हैं । – चाणक्य


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