सन्त वाणी


मनमें संतोष होना स्वर्गकी प्राप्तिसे भी बढकर है, संतोष ही सबसे बडा सुख है । संतोष यदि मनमें भली-भांति प्रतिष्ठित हो जाए तो उससे बढकर संसारमें कुछ भी नहीं है ।- वेदव्यास


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