सन्तानें पालकोंका सम्मान करे, इस हेतु उनका भी वर्तन आदर्श होना चाहिए !


मैंने पाया है कि जैसे आजकी अनेक स्त्रियां अपने ससुरालवालोंसे स्नेह नहीं करती हैं और उनसे अपने पतिको भी दूर रखती हैं, वैसे ही आज अनेक सास-ससुर भी जैसा वर्तन अपनी पुत्री समान पुत्रवधूसे करना चाहिए, वैसा नहीं करते हैं । और यदि विवाहके आरम्भमें ही कुछ बहुत पीडादायक प्रसंग घटित हो जाए तो ऐसी स्थितिमें बहू अपने ससुरालवालोंको क्षमा नहीं कर पाती है । दोष और अहंका प्रमाण आज समाजमें बढ गया है तो अनेक बार आजके घरके वयोवृद्धोंसे भी अपने पुत्र व पुत्रवधुके साथ अनुचित आचरण होता है । यद्यपि इसका प्रमाण कम है; किन्तु कुछ प्रकरण जो मैंने अनुभव किए हैं, उन्होंने मेरे अन्तःकरणको ही झकझोर कर रख दिया है । आज ऐसे ही एक प्रकरणके विषयमें मैं आपको बताती हूं । मेरी आयु तब बारह वर्षकी होगी हमारे पिताजीके ममेरे भाईकी पुत्रीका विवाह हमारे नगरमें हुआ था । मैं जब ग्रीष्म ऋतुके अवकाशमें गांव जाती थी तो मेरी उससे मित्रता हो गई थी । यद्यपि वे मुझसे आयुसे सात-आठ वर्ष बडी रही होंगी । जब वे हमारे नगरमें आ गईं और उनका घर हमारे विद्यालय जानेके मार्गमें पडता था तो मैं कभी-कभी उनके पास जाती थी; परन्तु मैं जब भी जाती, उनके पूरे शरीरपर चोटके चिह्न हुआ करते थे, जिन्हें देखकर मुझे कभी क्रोध आता तो कभी उनके घरवालोंके प्रति घृणा होती । वे बहुत ही सुन्दर और मात्र सत्रह या अठारह वर्षकी होंगी; किन्तु जैसे वे खिलनेसे पहले ही मुरझा गई हों ! मैं घर आनेके पश्चात उसके विषयमें विचार करती और कभी भी विवाह न करनेका प्रण लेती ! उनकी सास ‘दहेज’में मांगी गई वस्तुओंके न मिलनेके कारण अपने पुत्रसे कुछ न कुछ झूठ बोलकर हमारी दीदीको पिटवाती थीं । यह प्रकरण तो मैंने अपने समक्ष ही देखा है । जीजाजी दीदीसे बहुत प्रेम करते थे और माताजीके उकसानेपर उन्हें पीटनेपर उन्हें बहुत पश्चाताप होता था और उन्होंने इसी दुःखमें मादक पदार्थोंका सेवनकर अपने जीवनका सर्वनाश कर लिया । लोभके मदमें अन्धे होकर आज अनेक सास-ससुर ऐसे पाप करते हैं और अपने ही हाथोंसे अपने पुत्रके जीवनको नरक बना देते हैं एवं आशा करते हैं कि उनके पुत्र व पुत्रवधुएं उनकी सेवा करें ! सन्तानें पालकोंका सम्मान करे, इस हेतु उनका भी वर्तन आदर्श होना चाहिए; इसलिए हिन्दू राष्ट्रमें बाल्यकालसे स्वभावदोषनिर्मूलन व अहंनिर्मूलन प्रक्रिया सिखाई जाएगी । – (पू.) तनुजा ठाकुर



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