सरस्वती स्तुति


पातु नो निकषग्रावा मतिहेम्न: सरस्वती ।
प्राज्ञेतरपरिच्छेदं वचसैव करोति या ॥

अर्थ : बुद्धिरूपी सोनेके लिए कसौटीके समान सरस्वतीजी, जो केवल वचनसे ही विद्धान् और मूर्खोंकी परीक्षा कर देती है, हमलोगोंका पालन करें ।



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