सत्त्व, रज एवं तम किसे कहते हैं ? (भाग – १)


सृष्टिकी रचना जिन मूल त्रिगुणोंसे हुई है, वे सत्त्व, रज एवं तम हैं । आधुनिक विज्ञान इस तथ्यसेे अनभिज्ञ है । ये तीनों घटक सजीव-निर्जीव, स्थूल-सूक्ष्म वस्तुओंमें विद्यमान होते हैं । किसी भी वस्तुसे प्रक्षेपित स्पन्दन उसके सूक्ष्म मूल सत्त्व, रज एवं तम घटकोंके अनुपातपर निर्भर होते हैं । इससे प्रत्येक वस्तुका व्यवहार भी प्रभावित होता है । मनुष्यमें इनका अनुपात केवल साधनासे ही परिवर्तित किया जा सकता है ।
आधुनिक विज्ञानके अनुसार, सृष्टि इन स्थूल कणोंसे बनी है – इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, मेसन्स, ग्लुओन्स एवं क्वार्क्स परन्तु आध्यात्मिक स्तरपर, सृष्टि उनसे भी अधिक मूल तत्त्वोंसे बनी है, जिसपर विज्ञान अभी तक शोध कर नहीं पहुंच पाया है । इन मूल तत्त्वोंको सूक्ष्म तत्त्व अर्थात त्रिगुण कहते हैं – सत्त्व, रज और तम । त्रिगुण शब्दमें, त्रि अर्थात तीन, तथा गुण अर्थात सूक्ष्म घटक ।
सत (सत्व), रज और तम, ये तीन गुण प्रकृतिमें रहते हैं । इन तीनों गुणोंसे ही प्रकृति निर्मित हुई है; अत: सत, रज और तम ये मूल द्रव्य प्रकृतिके उपादान द्रव्य हैं । ये गुण इसलिए कहलाते हैं कि ये रस्सीके रेशोंके समान आपसमें मिलकर पुरुषके लिए बंधनका कार्य करते हैं अथवा इसलिए कि पुरुषके उद्देश्य साधनके लिए गौण रूपसे सहायक हैं ।
ये त्रिगुण सूक्ष्म होनेके कारण प्रत्यक्ष नहीं देखे जा सकते हैं । सांसारिक विषयोंको देखकर उनका सूक्ष्मसे आकलन किया जाता है । कार्य-कारणका तादात्म्य रहता है, इसलिए विषय रूपी कार्योंका स्वरूप देखकर हम गुणोंके स्वरूपका अनुमान करते हैं । संसारके समस्त विषयों, सूक्ष्म बुद्धिसे लेकर स्थूल पत्थर, लकडी और पर्वतमें ये तीनों गुण पाए जाते हैं ।



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