जनवरी १८, २०१९
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मन्त्री डॉ. सत्यपाल सिंहने अधिकारियों और नेताओंको अपने बच्चोंको शासकीय विद्यालयोंमें पढाई करवानेके लिए कहा है । सत्यपाल सिंहका कहना है कि शासकीय विद्यालय और चिकित्सालयोंकी स्थितिमें तभी सुधार होगा, जब अधिकारियोंके बच्चे शासकीय विद्यालयोंमें पढेंगे और वे अपने परिजनोंकी चिकित्सा शासकीय चिकित्सालयोंमें करवाएंगे ।
मन्त्रीने ‘ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा-वर्तमान स्थिति, चुनौतियां एवं समाधान’ विषयपर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठीमें कहा कि अधिकारी इनकी स्थिति सुधारनेमें अपनी भूमिकाका निर्वहन करें । उन्होंने बताया, “यह तभी सम्भव होगा, जब अधिकारी, नेता, प्रभावी और उच्च पदोंपर बैठे लोग अपने बच्चोंको शासकीय विद्यालयमें पढाएंगें, साथ ही अपने परिजनोंकी चिकित्सा शासकीय चिकित्सालयोंमें कराएंगें !”
इस मध्य अन्य जानकारोंने भी कहा कि चण्डीगढमें स्थानीय अधिकारियोंके बच्चे शासकीय विद्यालयोंमें पढते हैं, जिससे वहां विद्यालयोंकी मूलभूत सुविधाएं अच्छी हुई हैं । इसके अतिरिक्त इन विद्यालयोंके परीक्षा परिणाम भी अच्छे हुए हैं । उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रोंमें प्रायः शिक्षक कार्य नहीं करते हैं, जो चिन्तनीय है । इस अवसरपर संस्थाकी ओरसे ग्रामीण क्षेत्रोंके विद्यालयोंपर कराए सर्वेक्षणके विवरणकी एक पुस्तिकाका भी विमोचन भी किया किया ।
“यह इस लोकतन्त्रके नेताओं व अधिकारियोंका कटु सत्य है ! न ही नेता और न ही अधिकारी मूलभूत सुविधाओंपर ध्यान देते हैं । शासन शिक्षाके लिए निधि देता है तो वह ऊपरके ऊपर समाप्त हो जाती है और न ही उसका लाभ छात्रोंतक पहुंचता है; क्योंकि सभी नेता अपने बच्चोंको बडे-बडे निजी संस्थानोंमें भेजते हैं तो स्वार्थी होनेके कारण बुद्धिमें यही रहता है कि मेरा काम चल रहा है, मुझे क्या ! इससे ज्ञात होता है कि आजकी राजनीतिपर स्वार्थ बलशाली है, राष्ट्रप्रेम नहीं ! ऐसेमें यहीं एक उत्तम समाधान है कि केन्द्र शासन इसे एक विधान बनाकर पारित करें कि सभी शासकीय छोटे-बडे पदोंसे सम्बन्धित व्यक्ति शासकीय संस्थानोंका ही प्रयोग कर पाएंगें ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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