जुलाई १३, २०१८
महाविद्यालय और विश्वविद्यालयके छात्रोंके पश्चात अब चाय उद्योगकी नगरके विद्यालयके बच्चोंपर है । इसका प्रमुख कारण है, चायके घरेलू उपभोगकी वृद्धि करना । वर्तमानमें देशमें पेय पदार्थोंके प्रति व्यक्ति उपभोग प्रति वर्ष केवल ७८६ ग्राम है । ऐसेमें उपभोग वृद्धि हेतु देशके कुछ नगरोंमें विद्यालयके बालकोंके मध्य चाय पीनेकी लत वृहद करनेका लक्ष्य रख रहा है । लक्ष्यकी पूर्ति एवं उपभोग वृद्धि हेतु विद्यालयके बालकोंके मध्य चायका प्रचार किया जाएगा ! इसके लिए ‘इण्डियन टी एसोसिएशन’ (आईटीए) व देशके चाय बागानोंके शीर्ष निकायोंने विभिन्न विद्यालयोंमें चायके प्रति अभियान चलानेके लिए दो विज्ञापन विभागोंसे अनुबन्ध किया है ।
समाचार विभागके विवरण अनुसार, ‘आईटीए’के अधिकारी आजम मोनेमका कहना है कि अभी भी भारतकी लगभग ३५ कोट्यावधि जनसंख्या चाय नहीं पीती है । इनमें मुख्य रूपसे बालक सम्मिलित हैं । अब हम विद्यालयके बच्चोंके मध्य चाय पीनेको लेकर अभियानका आरम्भ करेंगे ! इससे पूर्व युवाओंको लेकर महाविद्यालय व विश्वविद्यालयमें अभियान चलाया था । ‘आईटीए’ सर्वेक्षण विवरण और दो विज्ञापन विभागोंकी प्रस्तुतीके आधारपर एक योजनापर कार्यरत है । इसके प्रसारके लिए ‘आईटीए’ निधि भी उपलब्ध करवाएगी ।
वहीं, दूसरीओर निर्यातमें वृद्धिके लिए ‘आईटीए’ अब इराकके विपणिकी (बाजार) ओर मुड रही है । अभीतक ईराक भारतसे चाय आयात नहीं कर रहा था । इस माहके अन्तमें आईटीएका एक प्रतिनिधिमण्डल भी ईराकके विपणिमें पहुंच बनाने के लिए वहां जाएगा । अभी श्रीलंका और वियतनाम ईराकी विपणिमें चायके उपभोगको पूर्ण करते हैं । बता दें कि भारत चायके उत्पादनका एक बडा देश है । असम राज्य विश्वका सबसे बडा चाय उत्पादक क्षेत्र है, ब्रह्मपुत्र नदीके किनारे स्थित है ।
स्रोत : जनसत्ता
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