आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – १७)


आलू लोगोंमें बहुत लोकप्रिय है, ऐसे ही आप सबने एक नाम और सुना होगा, जो सबको खानेमें अत्यधिक रुचिकर लगता है और उसका नाम है, शकरकन्द (अंग्रेजी नाम : Sweet Potato; संस्कृत नाम : मिष्टालुकम्) । शकरकन्द अपने स्वादके कारण अत्यधिक लोकप्रिय है । फलाहारियोंका यह बहुमूल्य आहार है । भारतमें बिहार और उत्तर प्रदेशमें विशेष रूपसे इसकी कृषि होती है । यह ऊर्जा उत्पादक आहार है ।
घटक – इसमें अत्यधिक मात्रामें ‘विटामिन’ रहते हैं, जैसे विटामिन-ए और सी’ । इसमें स्टार्चकी मात्रा भी अधिक होती है । इसके अतिरिक्त इसमें ‘फाइबर’, ‘प्रोटीन’, ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘कैल्शियम’की मात्रा भी मिलती हैं ।
सेवन विधि – इसे आप कच्चा और पकाकर दोनों रूपमें खा सकते हैं । कुछ लोग इसे अग्निमें पकाते हैं और उसके पश्चात सेन्धा नमक, नींबू आदि लगाकर खाते हैं । जो शकरकन्द लाल होते हैं, उसके गूदे सूखे और ठोस होते हैं और जो शकरकन्द श्वेत और पीले रंगके होते हैं, उनके गूदेके भीतर अत्यधिक रस होता है । लाल शकरकन्दको यदि उबालकर खाते हैं तो आपको और भी अधिक पोषक तत्व मिल जाते हैं । सूखेमें यह खाद्यान्नका स्थान ले सकता है ।
आइए, शकरकन्दके लाभके विषयमें जानते हैं –
* मधुमेहमें – जैसा हम सब जानते हैं कि जिन्हें मधुमेह रोग होता है, उन्हें मीठी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए; परन्तु मीठा आलू मधुमेह वालोंके लिए बहुत ही लाभप्रद होता है । यह शरीरमें उचित स्रावके कार्यमें सहायक होता है, जिसके कारण रक्त शर्कराका स्तर सदैव सन्तुलित रहता है । शकरकन्दका प्रयोग यदि ‘कार्बोहाइड्रेट’ युक्त भोजन या चावलके स्थानपर किया जाए तो शरीरको इससे कोई हानि नहीं होती है ।
* उदरके (पेटके) व्रणमें (अल्सरमें) – शकरकन्द उदर और आंतोंके लिए अत्यधिक लाभप्रद होता है । इसके भीतर अत्यधिक पोषक तत्व होते हैं, जिनके कारण आपके उदरमें यदि व्रण (अल्सर) है तो वह भी ठीक हो जाएगा । इससे कब्ज और वायु विकारकी समस्याका भी अन्त होता है ।
* जल तत्वको बनाए रखनेमें (हाइड्रेटेड रखनेमें) – शकरकन्दमें ‘फाइबर’ होता है, जिसके कारण शरीरमें जलकी न्यूनता (डिहाइड्रेशन) कभी भी नहीं होती है । शकरकन्द जलकी मात्राको बनाए रखनेमें सहायक होता है ।
* भार वृद्धिमें – शरीरके भार(वजन) वृद्धिके लिए शकरकन्द अत्यधिक उत्तम आहार है; क्योंकि इसके भीतर अत्यधिक मात्रामें ‘स्टार्च’ होता है और इसके अतिरिक्त इसमें ‘विटामिन’ और खनिज पाए जाते हैं । शकरकन्द सरलतासे पच भी जाता है और आपको अधिक ऊर्जा भी देता है; इसलिए यह भार वृद्धिमें सहायक होता है ।
* प्रतिरक्षा प्रणालीमें – इसमें ‘विटामिन बी कॉम्पलेक्स’, लौहतत्व, ‘विटामिन-सी’ आदि मिलते हैं, जिसके कारण आपके भीतर रोगोंसे लडनेकी शक्तिमें वृद्धि होती है ।
* श्वसन-शोथमें (ब्रोंकाइटिसमें) – श्वसन-शोथमें शकरकन्दका अवश्य ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके भीतर ‘विटामिन सी’, लौहतत्व और कई प्रकारके पोषक तत्व विद्यमान होते हैं, जिनके कारण यह रोग समाप्त हो जाता है । इसके सेवनसे शरीर उष्ण रहता है, शरीरका तापमान समान रहता है, जिससे यदि फेफडोंमें ‘कफ’ एकत्र हुआ है तो यह उसे निकालनेमें भी सहायक है ।
* पाचनमें उपयोगी – शकरकन्दमें ‘फाइबर’ अधिक मात्रामें होता है । इसके अतिरिक्त इसमें ‘मैग्नीशियम’ भी होता है, जिसके कारण पाचन शक्तिमें वृद्धि होती है ।
* कर्करोगमें (कैंसरमें) – शकरकन्दमें ‘बीटा-कैरोटीन’, आक्सीकरणरोधी (एंटीऑक्सीडेंट) और ‘एंटी कार्सिनोजेनिक’ पदार्थ होते हैं, जिससे कर्करोगसे सुरक्षा सम्भव है ।
सावधानियां – १. अधिक शकरकन्द खानेसे वृक्कमें (गुर्देमें) पथरी भी हो सकती है; क्योंकि इसके भीतर आपको ‘ऑक्सलेट’, ‘कैल्शियम-ऑक्सलेट’ मिलता है; अतः सीमित मात्रामें ही इसका सेवन करना चाहिए ।
२. शकरकन्द उन लोगोंको नहीं खाना चाहिए, जिनके वृक्क (गुर्दे) कार्यरत नहीं हैं अथवा रोगग्रस्त हैं । ऐसे लोगोंको शकरकन्दका सेवन चिकित्सकके परामर्श लेनेके पश्चात ही करना चाहिए ।
३. कुछ लोगोंको उदर वेदना (पेट दर्द) रहती है या उनका अमाशय शीघ्र ही रोगग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोगोंको भी शकरकन्दका सेवन नहीं करना चाहिए ।



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